मुख्यपृष्ठनए समाचारसरकारी बस सेवा के निजीकरण की साजिश...निजी ठेकेदारों की मुट्ठी में ‘बेस्ट’!

सरकारी बस सेवा के निजीकरण की साजिश…निजी ठेकेदारों की मुट्ठी में ‘बेस्ट’!

-८५ प्रतिशत से अधिक बेड़ा निजी हाथों में सौंपा; ‘आपली बेस्ट’ संगठन ने उठाए सवाल

द्रुप्ति झा / मुंबई

मुंबईकरों की दूसरी लाइफलाइन ‘बेस्ट’ बस सेवा अब निजी ठेकेदारों की मुट्ठी में जाती हुई दिखाई दे रही है। बेस्ट की अपनी बसों और कर्मचारियों को मजबूत करने के बजाय निजी ऑपरेटरों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर ‘आपली बेस्ट’ संगठन ने गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि कहीं सरकारी बस सेवा को सुनियोजित तरीके से कमजोर कर निजी हाथों में सौंपने की तैयारी तो नहीं चल रही?
आपली बेस्ट संगठन की चेतावनी
‘आपली बेस्ट’ ने मांग की है कि निजीकरण की दिशा में बढ़ने के बजाय बेस्ट की अपनी बसों का बेड़ा बढ़ाया जाए और स्थायी कर्मचारियों की भर्ती की जाए। संगठन ने चेताया है कि अगर यही सिलसिला जारी रहा तो आने वाले समय में आपली बेस्ट कहीं सिर्फ नाम की सरकारी सेवा बनकर न रह जाए।
बेस्ट के पास सिर्फ २४९ बसें
बेस्ट का ८५ प्रतिशत से अधिक बसों का बेड़ा निजी ठेकेदारों की वेट-लीज बसों द्वारा संचालित किया जा रहा है और बेस्ट के पास खुद की सिर्फ २४९ बसें ही चल रही हैं, जो कि यात्रियों की संख्या की तुलना में बहुत ही कम है। निजी बसों पर बढ़ती निर्भरता और रखरखाव संबंधी चिंताओं के कारण, महाराष्ट्र सरकार और बेस्ट प्रशासन ने ६,५०० करोड़ की लागत से ५,००० नई खुद की इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की योजना बनाई है।

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