-बाजार से नकदी सोखने की तैयारी; बॉन्ड यील्ड बढ़ी तो होम, कार लोन
और कारोबारी कर्ज पर पड़ेगा असर
सामना संवाददाता / मुंबई
महंगे कच्चे तेल और कमजोर होते रुपये के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग व्यवस्था से १ लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त नकदी निकालने के लिए सरकारी बॉन्ड बेचने का बड़ा फैसला किया है। पहली नजर में यह बैंकों और बॉन्ड बाजार से जुड़ा तकनीकी कदम लगता है, लेकिन इसका असर आम आदमी की जेब तक पहुंच सकता है।
नए कर्ज लेने वालों पर भी होगा असर
जब आरबीआई बॉन्ड बेचता है तो बैंक और दूसरे निवेशक अपनी नकदी लगाकर ये बॉन्ड खरीदते हैं। इससे बाजार में उपलब्ध नकदी कम हो सकती है। नतीजतन सरकारी बॉन्ड की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है और उनकी प्रतिफल दर यानी यील्ड बढ़ सकती है। ज्यादा यील्ड का मतलब सरकार के लिए नया कर्ज महंगा होना और धीरे-धीरे कंपनियों तथा बैंकों की उधारी लागत पर भी दबाव बढ़ना है।
इसका पहला असर नए कर्ज लेने वालों पर दिखाई दे सकता है। बैंकों की धन जुटाने की लागत बढ़ी तो होम लोन, कार लोन और कारोबारी कर्ज की ब्याज दरों में कटौती की संभावना घट सकती है, जबकि कुछ दरें ऊपर भी जा सकती हैं। हालांकि, मौजूदा ऋणों की ईएमआई तुरंत बढ़ना जरूरी नहीं है। यह संबंधित ऋण की ब्याज दर की प्रकृति और बैंकों के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा। दूसरी ओर, कच्चा तेल १०० डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है और रुपया शुक्रवार को लगभग ९५.५५ प्रति डॉलर तक कमजोर हुआ। महंगा तेल पेट्रोल-डीजल, परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ाकर पहले ही महंगाई का खतरा पैदा कर रहा है। यानी आम आदमी के सामने दोहरा दबाव बन सकता है। एक तरफ महंगाई और दूसरी तरफ सस्ते कर्ज की उम्मीद पर ब्रेक।
