-तेल १०२ डॉलर, सेंसेक्स के १,२४८ अंक साफ!
सामना संवाददाता / मुंबई
पश्चिम एशिया की जंग और कच्चे तेल की आग ने भारतीय बाजार की कश्ती हिला दी। ब्रेंट क्रूड १०२ डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचते ही दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली का तूफान आ गया। सेंसेक्स १,२४८ अंक यानी करीब १.७ प्रतिशत लुढ़क गया, जबकि निफ्टी में १.६ प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। एनएसई पर लगभग ७१ प्रतिशत शेयर लाल निशान में बंद हुए। बाजार की घबराहट बताने वाला इंडिया वीआईएक्स करीब २३ प्रतिशत उछल गया। बीमा और वित्तीय कंपनियों के शेयरों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी। विदेशी निवेशकों की निकासी और महंगे डॉलर ने दबाव और बढ़ाया। रुपया ९५.९५ प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
आर्थिक तैयारी कहां है?
सवाल यह है कि सरकार की आर्थिक तैयारी कहां है? तेल महंगा होने का अर्थ केवल शेयर बाजार की गिरावट नहीं। इससे पेट्रोल-डीजल, परिवहन, खाद, उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत बढ़ेगी। युद्ध लंबा खिंचा तो बाजार की यह गिरावट आम आदमी की रसोई तक महंगाई बनकर पहुंचेगी। सरकार को बताना होगा कि उसके पास तेल और रुपये के संकट से निपटने की योजना क्या है।
