मुख्यपृष्ठनए समाचारवाह रे महायुति सरकार हजारों शिक्षकों की फर्जी भर्ती!

वाह रे महायुति सरकार हजारों शिक्षकों की फर्जी भर्ती!

-न विज्ञापन, न साक्षात्कार, न मूल दस्तावेज फिर भी वर्षों तक सरकारी नौकरी और वेतन

रामदिनेश यादव / मुंबई
महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था में करोड़ों रुपए के शिक्षक भर्ती घोटाले ने महायुति सरकार के प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक हजार से अधिक शिक्षकों की कथित अवैध नियुक्तियों का मामला सामने आया है। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि इन नियुक्तियों से संबंधित एक भी मूल फाइल या दस्तावेज शिक्षा विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। सरकारी अधिवक्ता द्वारा न्यायालय में यह जानकारी दिए जाने के बाद मुंबई उच्च न्यायालय ने पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जताई। और राज्य सरकार को फटकार लगाई।
न्यायमूर्ति माधव जे. जामदार की खंडपीठ ने तत्कालीन शिक्षाधिकारी किरण कुंवर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए। न्यायालय ने सवाल किया कि जब शिक्षक भर्ती के लिए न कोई विज्ञापन जारी हुआ, न साक्षात्कार हुआ और न ही नियुक्तियों से संबंधित मूल संचिकाएं मौजूद हैं, तो फिर इन नियुक्तियों को स्वीकृति कैसे मिली और सरकारी वेतन कैसे शुरू हो गया?
मामले में कथित रूप से फर्जी शिक्षक पात्रता परीक्षा प्रमाणपत्रों और झूठे दस्तावेजों के आधार पर वेतन प्राप्त करने के लिए पहचान संख्या बनाए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि इस व्यवस्था के माध्यम से लगभग दस वर्षों से सरकारी धन का भुगतान होता रहा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी, उपसंचालक और शिक्षाधिकारी इतने वर्षों तक क्या करते रहे?
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की जांच की दिशा पर भी सवाल उठाया है। न्यायालय ने पूछा कि इतने बड़े भ्रष्टाचार के बावजूद जांच सही दिशा में चल रही है या नहीं और जांच के दौरान अधिकारियों का बार-बार स्थानांतरण क्यों किया जा रहा है।
दस साल तक चलता रहा खेल?
फर्जी शिक्षक पात्रता परीक्षा प्रमाणपत्र और कथित झूठे दस्तावेजों के आधार पर पहचान संख्या बनाकर वेतन भुगतान का आरोप है। हाईकोर्ट ने जांच की दिशा और अधिकारियों के बार-बार तबादलों पर भी सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

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