– आदित्य ठाकरे ने बंधाया ढांढस, शिवसेना किसानों के साथ मजबूती से ख़ड़ी
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में भयंकर सूखे का भय केवल बड़े-बुजुर्गों के मन में ही नहीं, बल्कि मासूम बच्चों के मन में भी घर कर गया है। शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे को शनिवार को धाराशिव दौरे के दौरान इसका मार्मिक अनुभव देखने को मिला। सूखा पड़ने के बाद से धाराशिव का एक मासूम बच्चा अपने पिता का साथ छोड़ने को तैयार नहीं है।
वह हर समय अपने पिता के पीछे परछार्इं की तरह घूमता रहता है। उसके मन में डर है कि कहीं उसके पिता अपने साथ कुछ गलत न कर लें। एक किसान द्वारा अपनी यह व्यथा सुनाए जाने पर आदित्य ठाकरे भावुक हो गए। उन्होंने तत्काल इस परिवार की मदद की और उन्हें ढांढस बंधाया। साथ ही, शिवसेना किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है, ऐसा भरोसा भी दिलाया। धाराशिव जिले के खानापुर में आदित्य ठाकरे ने सूखे से झुलसी फसलों का जायजा लिया। आदित्य ठाकरे को खेत की मेड़ पर पहुंचा देखकर किसानों ने उन्हें घेर लिया और बर्बाद हुई फसलें दिखाकर अपनी व्यथा सुनाई। नूर बेग भी अपने बेटे के साथ खेत पर मौजूद थे। आदित्य ठाकरे को देखकर वे भी उनके पास पहुंचे और उन्होंने अपनी फसल की स्थिति तथा परिवार पर आए संकट की जानकारी दी। उन्होंने अपने बेटे की मानसिक स्थिति के बारे में भी बताया। नूर बेग ने कहा, ‘मेरे पास कभी-कभी सोने वाला मेरा बच्चा अब रोज मेरे पास आकर सोता है। हम दोनों एक ही तकिये पर सिर रखकर सोते हैं। मैं पेशाब करने के लिए भी जाता हूं तो वह पीछे-पीछे आता है।
हमारे खेत में फसल ही नहीं हुई!
नूर बेग की व्यथा सुनने के बाद आदित्य ठाकरे ने उनके बेटे अल्ताफ को अपने पास बुलाया और उसके कंधे पर हाथ रखकर उससे बातचीत की। अल्ताफ ने अपनी समझ के अनुसार, पिता की पीड़ा बताई। उसने कहा, ‘हमारे खेत में फसल ही नहीं हुई। सोयाबीन भी नहीं आया। स्कूल की फीस भरने के लिए पैसे नहीं हैं। पापा कहते हैं कि फसल खराब हो गई। मैंने पूछा कि स्कूल की फीस वैâसे भरेंगे? तो उन्होंने कहा कि कुछ न कुछ करेंगे, नहीं तो कर्ज लेंगे।’ अल्ताफ ने यह भी बताया कि उसके पिता बीमार हैं और उनके इलाज तथा दवाइयों के लिए भी पैसे नहीं हैं। परिवार की यह स्थिति समझने के बाद आदित्य ठाकरे ने बच्चे की स्कूल फीस और उसके पिता की दवाइयों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता दी और शिवसैनिकों को उनके संपर्क में रहने का निर्देश दिया।
इस बार की स्थिति १९७२ से भी भयावह
एक किसान ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि मराठवाड़े में इस वर्ष १९७२ से भी भयावह स्थिति है। केवल इंसानों का ही नहीं, बल्कि पशुओं का भी बुरा हाल है। मैंने अपनी भैंसें बेच दीं, लेकिन उन्हें खरीदने वाले ने अभी तक पैसे नहीं दिए हैं। वह कहता है कि बिक्री होने के बाद पैसे देगा। चारों तरफ से संकट आ गया है। किसान ने कहा कि जब तक किसानों के खातों में सहायता की राशि नहीं पहुंचती, तब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। किसानों ने सरकार से सवाल किया कि जब सरकार हर काम के लिए कर्ज लेती है, तो किसानों की मदद के लिए कर्ज लेने में क्या परेशानी है?
