-पौधे सहेज नहीं पा रहा रेलवे
-वडाला रोड स्टेशन पर कहीं गमले गायब
– जमीन पर बिखरे पड़े हैं पौधे
संदीप पांडेय / मुंबई
एक तरफ रेलवे बुलेट ट्रेन जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के जरिए यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, तो दूसरी तरफ मुंबई के वडाला रोड रेलवे स्टेशन पर लगाए गए पौधों और गमलों को सहेजने तक में नाकाम साबित हो रहा है। स्टेशन को सुंदर बनाने के नाम पर लगाए गए कई गमले गायब हैं, तो कई जमीन पर पड़े हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब रेलवे अपने ही स्टेशन पर लगाए गए पौधों की देखभाल नहीं कर सकता, तो सौंदर्यीकरण के नाम पर टैक्सपेयर की गाढ़ी कमाई खर्च करने का औचित्य क्या है? क्या रेलवे की जिम्मेदारी सिर्फ रंग-रोगन, गमले लगाने और तस्वीरों में स्टेशन को खूबसूरत दिखाने तक ही सीमित रह गई है? यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के नाम पर बड़े-बड़े दावे करना आसान है, लेकिन उन सुविधाओं को लंबे समय तक बनाए रखना ही असली कसौटी है।
वडाला रोड स्टेशन की मौजूदा तस्वीर रेलवे के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करती है और यह सवाल खड़ा करती है कि क्या ठेकेदार को काम सौंपने और भुगतान करने के बाद रेलवे के संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? यदि ऐसा नहीं है, तो फिर स्टेशन पर इस तरह की बदहाली वैâसे पनप रही है? यह समस्या सिर्फ वडाला रोड स्टेशन तक सीमित नहीं है। मुंबई के कई रेलवे स्टेशनों पर सौंदर्यीकरण के बाद पौधों और गार्डन के रखरखाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
पानी की कमी का हवाला
स्टेशन पर गार्डन और पौधों के रखरखाव को लेकर संबंधित विभाग की ओर से पानी की कमी का हवाला दिया जा रहा है। विभाग का कहना है कि पर्याप्त पानी उपलब्ध होने पर उसी के अनुसार, प्लांटेशन और गार्डन के रखरखाव का काम किया जाएगा। लेकिन यही दलील रेलवे की योजना और व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। जब पौधों को लगाने के बाद उन्हें नियमित पानी देना और उनकी देखभाल करना जरूरी है, तो प्लांटेशन की योजना बनाते समय पानी की उपलब्धता का आकलन क्यों नहीं किया गया? क्या पौधे लगाने से पहले यह तय नहीं होना चाहिए था कि उनकी सिंचाई वैâसे होगी, रखरखाव कौन करेगा और गमलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी?
