मुख्यपृष्ठनए समाचारधारावी पुनर्विकास में झोपड़ियां खाली नहीं करने वालों के किराए में कटौती

धारावी पुनर्विकास में झोपड़ियां खाली नहीं करने वालों के किराए में कटौती

-सामाजिक कार्यकर्ता संजय भालेराव ने जताया विरोध
सामना संवाददाता / मुंबई
धारावी पुनर्विकास परियोजना के तहत झोपड़ियां तत्काल खाली नहीं करने या उन्हें खाली कराने में सहयोग नहीं करने वाले निवासियों को दिए जाने वाले किराए में अडानी कंपनी द्वारा कटौती किए जाने का मामला सामने आया है। इस पैâसले से धारावी के निवासियों में असंतोष है। सामाजिक कार्यकर्ता संजय रमेश भालेराव ने भी कड़ा विरोध किया है।
इस संबंध में भालेराव ने पुनर्विकास परियोजना के विशेष कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेंद्र कल्याणकर को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि भूतल की झोपड़ियों के लिए निर्धारित मासिक किराया १८,००० रुपए से घटाकर १५,००० रुपए कर दिया गया है। वहीं, मेजेनाइन मंजिल की झोपड़ियों का किराया १५,००० रुपए से घटाकर १२,००० रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है। इसके अलावा, प्रति झोपड़ी मिलने वाला ५,००० रुपए का स्थानांतरण भत्ता भी रद्द कर दिया गया है। व्यावसायिक और औद्योगिक उपयोग वाली जगहों के लिए १७५ रुपए प्रति वर्गफुट के मासिक किराए को भी घटाकर १४५ रुपए प्रति वर्गफुट किया गया है।
महाराष्ट्र झोपड़पट्टी क्षेत्र अधिनियम, १९७१ की धारा ३३ और ३८ तथा डीसीपीआर-२०३४ के प्रावधानों का उल्लेख अडानी कंपनी ने धारावी के सेक्टर-६ में पुनर्विकास प्रक्रिया के संबंध में जारी अपने एक पत्र में किया है। हालांकि, इन प्रावधानों के आधार पर निवासियों के ट्रांजिट आवास के किराए में कटौती करने का अधिकार कहां है, ऐसा सवाल संजय भालेराव ने उठाया है।
भालेराव का कहना है कि पुनर्विकास के बाद निवासियों को घर धारावी में ही मिलेगा या किसी अन्य स्थान पर, इसे लेकर लिखित आश्वासन नहीं मिला है। इसके अलावा, धारावी का मास्टर प्लान भी सार्वजनिक नहीं किया गया है। दूसरी ओर, मौजूदा परिस्थितियों में किराए पर घर ढूंढ़ना भी निवासियों के लिए मुश्किल हो रहा है। पहले निवासियों की इन समस्याओं को हल करें। जब तक पुनर्वास स्थल, आवास और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक निवासियों पर दबाव बनाना उनके साथ अन्याय करने जैसा है।

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