-मुंबई-पुणे मार्ग से ८९ ज्यादा जान गईं,
-आंकड़ों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
जेदवी / मुंबई
तेज रफ्तार सफर का सपना दिखाने वाले मुंबई-नागपुर समृद्धि महामार्ग पर मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जनवरी से अगस्त २०२६ तक महज आठ महीनों में १४२ हादसों में १२८ लोगों की जान जा चुकी है। यह संख्या वर्ष २०२४ में पूरे साल दर्ज १२६ मौतों से भी अधिक है। महाराष्ट्र पुलिस के यातायात विभाग से आरटीआई के जरिए मिली जानकारी ने एक्सप्रेसवे की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर सुरक्षा इंतजाम कितने कारगर?
समृद्धि महामार्ग पर बढ़ते यातायात को हादसों में वृद्धि की एक वजह माना जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में अतिवेग और चालक की थकान अथवा ‘हाईवे हिप्नोसिस’ जैसे कारणों का भी उल्लेख है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों से किसी एक कारण को सभी दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। फिर भी सवाल सीधा है—जब लगातार हादसे और मौतें सामने आ रही हैं तो गति नियंत्रण, निगरानी, चालक जागरूकता और दुर्घटना रोकथाम के उपायों का असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है?
मुंबई-पुणे से ८९ मौतें ज्यादा
आंकड़ों की तुलना करें तो तस्वीर और भी चौंकानेवाली है। जनवरी-अगस्त २०२६ के दौरान मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर १०५ हादसों में ३९ मौतें दर्ज हुर्इं, जबकि इसी अवधि में समृद्धि महामार्ग पर १४२ हादसों में १२८ मौतें हुर्इं। यानी हादसे ३७ अधिक, लेकिन मृतकों की संख्या ८९ ज्यादा रही। समृद्धि महामार्ग पर वर्ष २०२५ में २०२ हादसों में १७३ लोगों की मौत हुई थी। वर्ष २०२४ में १३७ हादसों में १२६ मौतें दर्ज हुई थीं। २०२६ के अभी चार महीने बाकी हैं और मौतों का आंकड़ा पहले ही २०२४ के पूरे साल का रिकॉर्ड पार कर चुका है।
