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आनेवाली है महंगाई की नई सुनामी?…मोदी सरकार के मंत्री ही बजा रहे खतरे की घंटी!

-पहले जयशंकर का चार मोर्चों वाला संकट, अब निर्मला सीतारमण का खाद्य सुरक्षा पर अलर्ट
-सरकारी आश्वासनों के बीच बढ़ती चिंता, अगर खतरा इतना बड़ा नहीं तो
दो वरिष्ठ मंत्री लगातार क्यों जता रहे हैं आशंका?
-राहुल गांधी ने महीनों पहले चेताया था, अब सरकार के मंत्री भी वही डर बता रहे हैं
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
महंगाई की मार से पहले ही परेशान आम आदमी के सामने क्या अब एक और बड़ी चिंता खड़ी होने वाली है? दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे युद्ध और उससे बिगड़ती आपूर्ति व्यवस्था का असर क्या अब सीधे भारत की रसोई तक पहुंच सकता है? सवाल इसलिए गंभीर है क्योंकि अब यह आशंका केवल विपक्ष के बयानों तक सीमित नहीं रही। मोदी सरकार के दो वरिष्ठ मंत्री खाद्य, र्इंधन, उर्वरक और वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुनिया के सामने खाद्य, र्इंधन, उर्वरक और वित्त, इन चार मोर्चों पर मंडराते संकट की तस्वीर सामने रखी। उन्होंने आने वाले महीनों में बड़े खाद्य संकट की आशंका जताई और वैश्विक उर्वरक संकट तथा मौसम संबंधी चुनौती को भी चिंता का विषय बताया। और अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
अब तक सरकार की ओर से यही संदेश आता रहा कि युद्ध के भारत पर पड़ने वाले असर को सीमित रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठकों में भी खाद्य, र्इंधन, उर्वरक और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने के उपायों पर चर्चा हुई थी। सरकार ने आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार निगरानी और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही थी। लेकिन अब तस्वीर में एक सवाल तेजी से उभर रहा है कि अगर खतरा इतना बड़ा नहीं है, तो मोदी सरकार के दो वरिष्ठ मंत्री लगातार खतरे की घंटी क्यों बजा रहे हैं?
जयशंकर ने क्या चेताया?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में वैश्विक परिस्थितियों को लेकर खाद्य, र्इंधन, उर्वरक और वित्त के चार मोर्चों पर संकट की बात कही। उन्होंने आने वाले महीनों में बड़े खाद्य संकट की आशंका जताई और संभावित ‘सुपर अल नीनो’ जैसी मौसम संबंधी चुनौती से हालात और कठिन होने की बात कही। जयशंकर का संदेश साफ था कि अलग-अलग संकट अब एक-दूसरे से जुड़ते जा रहे हैं।
निर्मला की चेतावनी में क्या है चिंता?
म्यूनिख लीडर्स बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में व्यवधान का मुद्दा उठाया। उन्होंने मलक्का जलडमरूमध्य का भी उल्लेख किया और संकेत दिया कि वहां किसी तरह का व्यवधान स्थिति को और गंभीर बना सकता है। इन समुद्री रास्तों से ऊर्जा और अन्य जरूरी सामान की आवाजाही प्रभावित होने पर परिवहन, बीमा और आयात की लागत बढ़ सकती है।
राहुल की चेतावनी बनाम सरकार का अलर्ट
लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्ष लंबे समय से महंगाई और आर्थिक दबाव को लेकर सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। राजनीतिक आरोपों और जवाबी दावों से अलग अब चर्चा का केंद्र एक ठोस सवाल पर आकर ठहर गया है कि अगर वैश्विक संकट भारत की खाद्य और आर्थिक सुरक्षा पर असर डाल सकता है, तो उसकी तैयारी कितनी मजबूत है।

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