मुख्यपृष्ठनए समाचारहक मांगने वाले राक्षस; बेटा देवता?

हक मांगने वाले राक्षस; बेटा देवता?

-कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद ज्ञानेश कुमार की मां ने घर का कराया शुद्धीकरण
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
आगरा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक घर का गंगाजल से शुद्धीकरण हुआ। उनकी मां सत्यवती ने कहा कि २८ सितंबर को घर के बाहर आए ‘राक्षस प्रवृत्ति’ के लोगों ने उसे गंदा किया था। पीले कपड़ों में महिलाओं की कलश यात्रा निकली; फिर गंगाजल छिड़का गया और सुंदरकांड शुरू हुआ।
अब व्यंग्य का सवाल यही है; जो लोग अपना हक मांग रहे हैं, वे राक्षस और जिस बेटे की भूमिका पर मतदाताओं का हक छीनने के आरोप लग रहे हैं, वह देवता? क्यों; क्योंकि वह आपका बेटा है? आरोपों की जांच और जवाब अपनी जगह; लेकिन विरोध करने वालों को राक्षसी बताकर घर को शुद्ध करने का सार्वजनिक आयोजन बहस को घर की चौखट से सीधे राजनीति के मंच पर ले आया।
जले पर नमक छिड़कने की कहावत थी; यहां हक मांगने वालों पर ‘राक्षस’ का ठप्पा और घर पर गंगाजल छिड़क दिया गया। पाठ से घर पवित्र हो सकता है; पर मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवालों का जवाब सुंदरकांड की चौपाइयों में नहीं मिलेगा। भक्तिभाव पूरा हुआ; अब लोकतंत्र के हक का हिसाब भी हो जाए।
आरोपों का जवाब गंगाजल से नहीं,
तथ्यों से दीजिए!
आरोप सही हैं या गलत, इसकी जांच और उसका जवाब अपनी जगह है। लोकतंत्र में किसी भी आरोप का जवाब तथ्यों और पारदर्शिता से दिया जाना चाहिए। लेकिन विरोध करने वालों को ‘राक्षस’ बताकर घर का सार्वजनिक शुद्धीकरण करना पूरे विवाद को घर की चौखट से निकालकर सीधे राजनीतिक बहस के मंच पर ले आता है।

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