मुख्यपृष्ठटॉप समाचार‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ!’

‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ!’

-सीईसी पर घमासान, दिल्ली बनी रणभूमि
-ज्ञानेश घिरे, विपक्ष सड़क पर उतरा
-संसद से निर्वाचन सदन निकले `इंडिया’ सांसदों को पुलिस ने रोका; राहुल-प्रियंका, अखिलेश-अभिषेक समेत कई हिरासत में
– राहुल बैरिकेड पर चढ़े, आकाशवाणी भवन में धरना; प्रियंका का नारा-‘ज्ञानेश को हटाना है, देश को बचाना है’
– सुप्रीम कोर्ट की फॉर्म-६ पड़ताल के अगले ही दिन सड़क पर फूटा विपक्ष का गुस्सा

नई दिल्ली / विशेष संवाददाता

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर छिड़ा विवाद अब अदालत और राजनीतिक बयानों से निकलकर सीधे सड़क पर आ गया। मंगलवार को `इंडिया’ ब्लॉक के सांसद संसद के मकर द्वार से निर्वाचन सदन की ओर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च पर निकले, लेकिन भारी पुलिस बंदोबस्त ने उन्हें बीच रास्ते रोक दिया। इसके बाद संसद क्षेत्र में जमकर राजनीतिक ड्रामा हुआ। राहुल गांधी बैरिकेड पर चढ़े, प्रियंका गांधी वाड्रा को पुलिस बस में बैठाया गया और सपा प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओब्रायन समेत कई सांसदों को हिरासत में लिया गया। राहुल और प्रियंका बाद में आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठ गए।
विपक्ष की मुख्य मांग थी कि सीईसी ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, एसआईआर वापस हो और मतदाता सूचियों से कथित रूप से गलत तरीके से हटाए गए नाम बहाल किए जाएं। प्रदर्शनकारियों ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाए। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में फिर लिखा, ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो, टाइम टू रिजाइन..!’
-अब १० अक्टूबर को फिर दिल्ली कूच

-जंतर-मंतर पर सीईसी के इस्तीफे की मांग करेगी सीजेपी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर वापस लेने की मांग को लेकर मंगलवार को इंडिया ब्लॉक के सांसदों का चुनाव आयोग की ओर मार्च बैरिकेड पर रोक दिया गया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। मार्च संसद से निर्वाचन सदन की ओर निकला था; सांसदों ने रास्ते में धरना देकर विरोध जताया। इस राजनीतिक टकराव के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने १० अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का एलान किया है। पार्टी संयोजक अभिजीत दीपके ने कहा है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा नहीं देने पर देशभर से समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे।

ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना ही होगा..!
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर उठते सवालों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब विपक्ष का साफ संदेश है कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना ही होगा!
मंगलवार के आंदोलन की पृष्ठभूमि सोमवार की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई बनी है। कोर्ट ने साफ कहा था कि उसने फॉर्म-६ के किसी संशोधित स्वरूप को मंजूरी नहीं दी और निर्वाचन आयोग से रिकॉर्ड मंगाने की बात कही, ताकि यह देखा जा सके कि कोई बदलाव हुआ तो किसने और किस अधिकार से किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि आयोग का कोई पैâसला न सर्वसम्मति से हुआ हो, न बहुमत से, तो उसे रद्द किया जा सकता है। हालांकि, अदालत ने न तो ज्ञानेश कुमार को दोषी ठहराया है और न ही उन्हें निलंबित किया है। इसी टिप्पणी को आधार बनाकर राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सीईसी द्वारा ‘पद का दुरुपयोग’ साबित हो गया है। निर्वाचन आयोग ने पलटवार करते हुए कहा कि फॉर्म-६ बदला ही नहीं गया और राहुल का दावा `मिसलिडिंग’ है। यानी मामला अब अदालत के रिकॉर्ड परीक्षण पर निर्भर है।
मार्च के दौरान सपा सांसद जया बच्चन ने ज्ञानेश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि ‘गणेश जी गलत कामों में मदद नहीं करते’, जबकि कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने आरोप लगाया कि मताधिकार छीने जाने के खिलाफ यह लड़ाई ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगी। शिवसेना सांसद संजय राऊत ने सवाल किया कि निहत्थे सांसदों को निर्वाचन आयोग तक जाने से रोकने के लिए इतनी भारी सुरक्षा क्यों लगाई गई।
दिल्ली से यूपी तक फैला विरोध
अखिलेश यादव को हिरासत में लिए जाने की खबर पहुंचते ही समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में सड़क पर उतर आए। लखनऊ, गोरखपुर, आगरा सहित विभिन्न शहरों में प्रदर्शन और पुलिस से धक्का-मुक्की की खबरें सामने आर्इं।

अन्य समाचार