-नासिक से पैदल मुंबई पहुंचे छात्र, मांगें सुनने के बजाय बसों में बैठाने का आरोप
-तिलक भवन के बाहर भारी पुलिस बंदोबस्त; छात्रों का दावा, `हमें आंदोलन तक नहीं करने दिया’
सामना संवाददाता / मुंबई
गोद में मासूम बच्चा, बस की खिड़की से बाहर लटका एक छात्र और चारों तरफ पुलिस…, मुंबई में मंगलवार को आदिवासी छात्रों के आंदोलन की ये तस्वीरें कई सवाल छोड़ गर्इं। नासिक से लंबी दूरी तय कर मुंबई पहुंचे आदिवासी छात्र शिक्षा, छात्रावास, छात्रवृत्ति और आश्रमशालाओं की बदहाली को लेकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना चाहते थे, लेकिन उनका आरोप है कि मांगें सुनने के बजाय पुलिस ने उन्हें जबरन बसों में बैठाकर मुंबई से बाहर भेजने की कोशिश की।
छात्रों ने तिलक भवन से मंत्रालय की ओर मार्च करने की योजना बनाई थी। लेकिन मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया। आयोजकों का दावा है कि कई छात्रों को हिरासत में लेकर निजी बसों और पुलिस वाहनों में बैठाया गया। कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्हें घंटों अलग-अलग स्थानों पर घुमाया गया और जरूरी सुविधाएं भी नहीं दी गर्इं।
प्रदर्शनकारी आश्रमशालाओं में बुनियादी सुविधाएं, छात्रावास व्यवस्था, छात्रवृत्ति, कथित अनियमितताओं की जांच और गडचिरोली की एक आश्रमशाला में सर्पदंश से हुई तीन छात्राओं की मौत के मामले में कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। कई छात्र नासिक से करीब १७० किलोमीटर का सफर तय कर मुंबई पहुंचे थे। मामले में मुंबई पुलिस ने कांग्रेस और प्रदर्शनकारियों के उस दावे को खारिज किया है कि पुलिस तिलक भवन में घुसकर छात्रों को गिरफ्तार करने पहुंची थी। पुलिस का कहना है कि स्थिति कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी थी। लेकिन सवाल तस्वीरों से उठ रहा है कि अगर आदिवासी छात्र अपनी पढ़ाई, छात्रावास और बुनियादी सुविधाओं की मांग लेकर राजधानी तक आए थे।
