सामना संवाददाता / मुंबई
एक तरफ मुंबई बढ़ती गर्मी, जहरीली हवा और घटते खुले स्थानों से जूझ रही है, दूसरी तरफ शहर के बाग-बगीचों और खेल मैदानों की मरम्मत के लिए बीएमसी की जेब खाली पड़ती दिखाई दे रही है। नगर निकाय के गार्डन और ट्री विभाग के करीब २०० प्रोजेक्ट फंड की कमी के कारण लंबित हैं।
बीएमसी को विधायकों और नगरसेवकों की ओर से करीब २१० प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें गार्डन, खेल मैदान और मनोरंजन स्थलों के निर्माण अथवा मरम्मत की मांग की गई है। लेकिन इनमें से लगभग २०० प्रस्ताव पैसे के अभाव में आगे नहीं बढ़ सके हैं।
तकनीकी आकलन के मुताबिक, जरूरी मरम्मत कार्यों के लिए करीब २५० करोड़ रुपए की जरूरत है, जबकि विभाग का मौजूदा वार्षिक बजट लगभग ६८ करोड़ रुपए है। यानी जरूरत के मुकाबले उपलब्ध रकम करीब एक चौथाई है। पिछले पांच वर्षों में गार्डन और ट्री विभाग का बजट भी लगातार घटा है।
यह स्थिति इसलिए अधिक गंभीर है, क्योंकि मुंबई में हीट आइलैंड प्रभाव और वायु प्रदूषण दोनों बढ़ रहे हैं। ऐसे में पार्क, पेड़, खेल मैदान और खुले क्षेत्र महज सौंदर्यीकरण का हिस्सा नहीं, बल्कि शहर की पर्यावरणीय सुरक्षा प्रणाली हैं।
मुंबई को कंक्रीट चाहिए या सांस?
सवाल यह है कि जब हजारों करोड़ रुपए सड़क, पुल और दूसरे बड़े इंप्रâास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर खर्च किए जा सकते हैं, तो शहर को सांस देने वाली हरियाली के लिए २५० करोड़ रुपए जुटाना इतना मुश्किल क्यों है? मुंबई में सीमेंट बढ़ रहा है, तापमान बढ़ रहा है, प्रदूषण बढ़ रहा है लेकिन उन्हें रोकने वाली हरियाली का बजट घट रहा है। यही विरोधाभास अब बीएमसी की पर्यावरण प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा कर रहा है।
