-रिकॉर्डिंग की तो जुर्माना, फोन जब्ती और अवमानना भी
सामना संवाददाता / मुंबई
अदालत न्याय का मंदिर है, सोशल मीडिया का कंटेंट सेंटर नहीं! बॉम्बे हाई कोर्ट ने कोर्ट की कार्यवाही चोरी-छिपे मोबाइल में रिकॉर्ड करने वालों को कड़ा संदेश देते हुए साफ कर दिया है कि अदालत के भीतर नियम तोड़ने की कीमत भारी पड़ सकती है। बिना अनुमति कोर्ट की कार्यवाही रिकॉर्ड करने वाले एक सरकारी कर्मचारी पर हाई कोर्ट ने ₹10 हजार का जुर्माना लगाया और उसका मोबाइल फोन जब्त करने का आदेश दिया।
मामला 5 अक्टूबर का है। न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ की कार्यवाही के दौरान पीछे की कतार में बैठे एक व्यक्ति के मोबाइल का फ्लैश जलता दिखाई दिया। संदेह होने पर कोर्ट स्टाफ ने मोबाइल जब्त कर लिया। जांच में सामने आया कि कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई थी। पकड़े जाने के बाद रिकॉर्डिंग डिलीट करने की कोशिश भी की गई, लेकिन कोर्ट के आईटी विभाग ने डिलीट की गई वीडियो बरामद कर ली।
हाई कोर्ट ने कहा कि अदालत की कार्यवाही जनता के लिए खुली हो सकती है, लेकिन कोर्ट रूम में मौजूद हर व्यक्ति को नियमों और अनुशासन का पालन करना ही होगा। अदालत ने यह भी चिंता जताई कि ऐसी रिकॉर्डिंग को बाद में मनमाने तरीके से एडिट और तोड़-मरोड़कर सोशल मीडिया पर फैलाया जा सकता है।
कोर्ट ने संबंधित व्यक्ति की माफी स्वीकार करते हुए तत्काल अवमानना की कार्रवाई नहीं की, लेकिन मोबाइल को जब्त कर उसका डेटा हटाने और कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे नष्ट करने का आदेश दिया। ₹10 हजार की राशि हाई कोर्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
