एयर इंडिया एक्सप्रेस पर गंभीर लापरवाही का आरोप; मुंबई हवाई अड्डे पर दो घंटे तक परेशान रहे अरविंद प्रभु
व्हीलचेयर का महत्वपूर्ण हिस्सा गायब, दिव्यांग खिलाड़ी ने पूछा, ‘मेरी जिंदगी की जरूरत को सामान समझकर कैसे छोड़ा?’
सामना संवाददाता / मुंबई
विमान कंपनियां यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन जब बात किसी १०० प्रतिशत शारीरिक दिव्यांग यात्री की हो, तब भी यदि उसकी व्हीलचेयर का महत्वपूर्ण हिस्सा विमान यात्रा के दौरान गायब हो जाए और उसे अपनी ही व्हीलचेयर के लिए घंटों इंतजार करना पड़े, तो सवाल केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि संवेदनशीलता का भी है। अखिल भारतीय पिकलबॉल एसोसिएशन तथा एशियन पिकलबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद रमेश प्रभु ने एयर इंडिया एक्सप्रेस पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। प्रभु १०वीं राष्ट्रीय पिकलबॉल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कोच्चि गए थे। ५ अक्टूबर को एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान IX1800 से सहायक के साथ मुंबई लौटने के बाद उन्हें पता चला कि उनकी व्हीलचेयर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गायब है।
व्हीलचेयर कोई सामान्य बैगेज नहीं है, जिसे खोने के बाद यात्री कुछ घंटे या एक-दो दिन इंतजार कर सके। दिव्यांग व्यक्ति के लिए व्हीलचेयर उसके पैरों का सहारा, स्वतंत्र जीवन का साधन और सुरक्षित आवागमन की अनिवार्य आवश्यकता है। इसके बावजूद मुंबई हवाई अड्डे पर समस्या का तत्काल समाधान न होने के कारण प्रभु को कथित तौर पर दो घंटे से अधिक समय तक परेशान होना पड़ा।
प्रभु के अनुसार, इस मामले में एयर इंडिया एक्सप्रेस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई और कंपनी की ओर से Property Irregularity Form (PIR) भी जारी किया गया। लेकिन सवाल यह है कि शिकायत दर्ज करने और कागज बनाने के बाद उस दिव्यांग यात्री की तत्काल जरूरत का क्या हुआ?
‘मैं व्हीलचेयर पर पूरी तरह निर्भर हूं’
प्रभु ने तीखे शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा, “मैं अपनी व्हीलचेयर पर पूरी तरह निर्भर हूं। फिर विमान कंपनी इतनी लापरवाही कैसे कर सकती है?”
उन्होंने मुंबई हवाई अड्डे पर एयर इंडिया एक्सप्रेस के संबंधित कर्मचारियों और CISF की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने का भी आरोप लगाया है। यदि एक दिव्यांग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल संगठन का अध्यक्ष अपनी मूलभूत आवश्यकता के लिए हवाई अड्डे पर घंटों भटकने को मजबूर हो, तो आम दिव्यांग यात्रियों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
जांच की मांग, मुआवजे की भी अपेक्षा
प्रभु ने इस पूरे मामले की नागरिक विमानन मंत्रालय, DGCA, एयर इंडिया एक्सप्रेस तथा संबंधित हवाई अड्डा प्रशासन द्वारा तत्काल जांच कराने की मांग की है। उन्होंने गायब हुए व्हीलचेयर के हिस्से को तत्काल खोजकर वापस करने, व्हीलचेयर की हैंडलिंग के संबंध में लिखित स्पष्टीकरण देने तथा हुए मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की है।
प्रभु का सवाल बिल्कुल सीधा है-दिव्यांग यात्री की व्हीलचेयर की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यदि विमानन व्यवस्था में दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष प्रावधान और संवेदनशीलता का दावा किया जाता है, तो फिर उनकी जीवनरेखा मानी जाने वाली व्हीलचेयर के साथ ऐसी लापरवाही कैसे हुई?
‘सुविधा देना एहसान नहीं, जिम्मेदारी है’
अरविंद प्रभु ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “दिव्यांग यात्री को सुविधा देना कोई कृपा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। व्हीलचेयर सामान्य सामान नहीं है; वह दिव्यांग व्यक्ति के स्वावलंबन और सम्मान के साथ जीने की आवश्यकता है।”
अब देखना यह है कि एयर इंडिया एक्सप्रेस इस गंभीर आरोप पर क्या जवाब देती है और संबंधित सरकारी एजेंसियां इस मामले की जांच कर दिव्यांग यात्रियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए क्या कदम उठाती हैं।
