-रोहित पवार ने फडणवीस सरकार को घेरा
– कर्जमाफी कागज पर, मदद घोषणाओं तक सीमित!
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे अन्नदाताओं की बदहाली ने महायुति सरकार के किसान हितैषी दावों की पोल खोल दी है। नांदेड जिले के बोरगांव निवासी ४६ वर्षीय किसान शंकर क्षीरसागर ने कर्ज के बोझ, फसल बर्बाद होने और बेटी की चिकित्सा शिक्षा की फीस का आर्थिक दबाव झेलते हुए आत्महत्या कर ली। यह पहला मामला नहीं है। ताजा आंकड़ों की मानें तो पिछले ५ वर्षों में लगभग १२ हजार अन्नदाताओं ने आत्महत्या की है। सरकार की नाकामियों के चलते भारी संख्या में किसानों को मजबूरन मौत को चुनना पड़ रहा है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों और ताजा रिपोर्टों से पता चलता है कि कर्ज, फसल का नुकसान, खेती की बढ़ती लागत और सरकारी सहायता मिलने में देरी किसानों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। २०२१–२०२४ वर्ष में राज्य के राहत विभाग के प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार ११,१७१ किसान आत्महत्याएं हुई हैं। इन पांच वर्षों में अकेले मराठवाड़ा क्षेत्र में ५,०७५ मामले दर्ज हैं। जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाते हुए किसान ने अपनी परेशानी की जांच करने की अपील करते हैं, लेकिन उनकी गुहार के बाद कोई सुनवाई नहीं होती, कागजों में उनके गुहार को उलझा दिया जाता है।
वर्ष किसान आत्महत्याएं
२०२१ २,७४३
२०२२ २,९४२
२०२३ २,८५१
२०२४ २,६३५
कुल ११,१७१
