मुख्यपृष्ठटॉप समाचारशिवसेना का हीरक महोत्सव, ऐतिहासिक विराट जनसभा!..ज्ञानेश कुमार यानी मोदी-शाह की नाभी!

शिवसेना का हीरक महोत्सव, ऐतिहासिक विराट जनसभा!..ज्ञानेश कुमार यानी मोदी-शाह की नाभी!

-धुआंधार! शिवतीर्थ पर उद्धव ठाकरे का तूफानी हमला!
सामना संवाददाता / मुंबई
पूरे देश की निगाहें जिस आयोजन पर टिकी थीं, वह असली शिवसेना के हीरक जयंती वर्ष का ऐतिहासिक और अत्यंत विराट दशहरा सम्मेलन कल शिवतीर्थ पर संपन्न हुआ। महाराष्ट्र के कोने-कोने से शिवतीर्थ पर भगवा जनसैलाब का तूफान उमड़ पड़ा। सम्मेलन में उपस्थित विशाल जनसमुदाय के समक्ष शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की निरंकुश सत्ता पर जोरदार प्रहार किया। उद्धव ठाकरे ने गर्जना करते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो जाता है। भीमनवार को छुट्टी पर भेज दिया जाता है, लेकिन ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं लिया जाता। क्योंकि रावण के प्राण उसकी नाभि में थे। उसी तरह ज्ञानेश कुमार मोदी-शाह की नाभि हैं। उस नाभि की रक्षा करने के लिए दिल्ली में लाखों की संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। लेकिन यह सब बहुत लंबे समय तक नहीं चलेगा। बारह वर्षों तक तुमने देश को छला है, प्रताड़ित किया है। देश की दुर्दशा कर दी। इसका परिणाम तो तुम्हें भुगतना ही पड़ेगा। उद्धव ठाकरे ने दृढ़ता से कहा कि हम सत्ता परिवर्तन भी करेंगे और देश को सही मायने में अच्छे दिन भी दिखाएंगे। उन्होंने आगामी सत्ता परिवर्तन के संघर्ष का उल्लेख करते हुए जनसमुदाय से आह्वान किया कि आने वाले सत्ता परिवर्तन के लिए जो भीषण संघर्ष होगा, उसमें छत्रपति शिवाजी महाराज, शाहू-फुले-आंबेडकर, प्रबोधनकार ठाकरे, शूरवीरों और संत-महात्माओं की विरासत वाला महाराष्ट्र भवानी मां की तलवार की तरह चमकना चाहिए। ऐसी शपथ लें। उद्धव ठाकरे के इस आह्वान पर शिवसैनिकों ने मुट्ठियां भींचकर जोरदार समर्थन दिया। पूरा शिवतीर्थ ‘छत्रपति शिवाजी महाराज की जय’, ‘शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे की जय हो’ और ‘उद्धव ठाकरे आगे बढ़ो’ के नारों से गूंज उठा।

वोट का अधिकार छीना,
आवाज उठाई तो नक्सली बताया!
उद्धव ठाकरे का जोरदार हमला
`मेरे तमाम हिंदू भाइयों, बहनों और माताओं… आज का दृश्य देखने लायक है। मुझे पहले के सारे दिन याद आ गए। चारों तरफ भगवा माहौल… और यही भगवा एक बार फिर से हमें केवल महाराष्ट्र की विधानसभा पर ही नहीं, बल्कि लाल किले पर भी फहराना है और पहले जैसा माहौल, मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि यह हमारी पहचान है। पवित्र भगवा, जो भगवा शिवराय ने अपनाया था, जो भगवा शिवसेनाप्रमुख ने हमारे हाथों में सौंपा था, वही यह पवित्र, निर्मल और पवित्र तेजस्वी भगवा है। निशान का झंडा अलग रखिए। लेकिन हमारी पहचान कोई नहीं चुरा सकता। कितने भी लुटेरे आ जाएं, लेकिन हमारा भगवा आप नहीं चुरा सकते’, ऐसा कहते हुए उद्धव ठाकरे ने खरी-खरी सुनाई।
`आज का सम्मेलन विशेष है। एक तो शिवसेनाप्रमुख का जन्मशताब्दी वर्ष है। शिवसेना के दशहरा सम्मेलन की जो परंपरा है, वह हीरक महोत्सव परंपरा है। यह उसका हीरक महोत्सवी सम्मेलन है। प्रबोधनकार ने जो नवरात्रोत्सव शुरू किया था, उसका भी जन्मशताब्दी वर्ष है। और खासतौर पर, जिस शिवाजी पार्क से शिवसेनाप्रमुख ने अपनी शिवगर्जना सबसे पहले दी, पहला दशहरा सम्मेलन इसी शिवतीर्थ पर हुआ था। इस मैदान का नाम शिवाजी पार्क भी था, इसके इस साल १०० वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह एक बहुत अच्छा संयोग है। यह संयोग कौन लाया, यह तो पता नहीं। लेकिन शिवसेनाप्रमुख का जन्मशताब्दी वर्ष और शिवाजी पार्क के नामकरण का जन्मशताब्दी वर्ष, यानी मैदान के लिए नेता और नेता के लिए मैदान, दोनों एक ही वर्ष में पैदा हुए। और ऐसे इस पवित्र दिन पर मैं आप सभी को दशहरे की शुभकामनाएं देता हूं। ऐसे ही सोने की तरह तेज से जगमगाते रहिए। और देश को भी एक बार फिर से वही चमक वापस दिलाइए। शिवसेनाप्रमुख के बारे में कई लोगों ने कई बार बोला है। लेकिन उन्होंने उस समय जो कुछ वाक्य कहे थे, वे आज भी हमारे हृदय में गहराई से अंकित हैं। और आज के समय में जो एक वाक्य याद आता है, वह यह है… मृत मन कभी क्रांति नहीं कर सकता। जीवित इंसानों की तरह व्यवहार करो, मुर्दों की तरह बिल्कुल मत रहो। और उनका दूसरा वाक्य था, क्रांति मर्दों की होती है और शांति मुर्दों की होती है। हम तो मर्द ही हैं। लेकिन दड़बे की मुर्गियों की तरह जिंदगी मत जियो’, ऐसा आह्वान उद्धव ठाकरे ने किया।
किसानों की मौत देखने कोई नहीं जाता..!
`आज विषय बहुत सारे हैं। मेरे से पहले के वक्ता कई विषयों पर बोल चुके हैं। कैलास पाटील ने ग्रामीण इलाकों के बारे में बताया है। सूखे की स्थिति कैसी है? गनीमत है कि हमें अभी इसके झटके और मार नहीं पड़ रही है। लेकिन यह सूखा बहुत विकराल है। और हमारे यहां जो कहावत है, `सूखे में तेरहवां महीना’, वैसे ही यह डबल इंजन की सरकार यहां बैठी है। सिर्फ घोषणाएं कर रही है। पिछले साल अतिवृष्टि हुई थी। अतिवृष्टि होने के बाद मैं खुद वहां गया था। जमीन की परतें की परतें उखड़ गई थीं, नीचे के पत्थर ऊपर आ गए थे और जमीन की ऊपरी उपजाऊ परत बह गई थी। कुएं गाद से भर गए थे, घर-बार, बर्तन, किताबें-कॉपियां, पूरी जिंदगी बह गई थी। और तब मुख्यमंत्री ने इतिहास का सबसे बड़ा पैकेज, इकतीस हजार करोड़, घोषित किया। जिनकी जमीन उखड़ गई है, उन्हें प्रति हेक्टेयर साढ़े तीन लाख रुपए। कितने लोगों को मिले? फसल बीमा कितने लोगों को मिला? क्योंकि पिछले साल जब मैं घूम रहा था, तब सचमुच किसानों की खिल्ली उड़ाई जा रही थी। सात रुपए का चेक, ग्यारह रुपये का… और अब भी जो पांच हजार रुपए की मदद दी है, यह कोई उपकार नहीं है। `नमो शेतकरी योजना’ की दो किस्तें बाकी हैं, वे चार हजार रुपए अभी तक आए नहीं हैं। वे मिलने बाकी हैं और आप पांच हजार रुपए उनके मुंह पर फेंक रहे हैं। बीमा के लिए जो पांच नियम तय किए थे, उन नियमों को लागू करने के बाद किसान को नुकसान भरपाई के रूप में बीमा मिलना चाहिए था, बीमा की राशि मिलनी चाहिए थी। बीमा के वे नियम ही हटा,  ताकि नुकसान भरपाई देने की जरूरत ही न पड़े। कर्जमाफी की घोषणा की गई। अब तक कितने लोगों को मिली, किसी को कुछ नहीं पता। केंद्रीय दल आकर गया। क्या देखा, कितने पंचनामे किए? निश्चित मदद कितनी और किसे मिलने वाली है? किसी को कुछ नहीं पता। और किसानों की हालत इतनी बुरी है। परभणी में झरी नाम का एक गांव है, उस गांव में युवराज बोधवड नाम का चौदह साल का लड़का था। वह स्कूल जाने लगा था। स्कूल की ट्रिप थी और यह युवराज अपने पिता के पीछे पड़ गया कि पापा मेरी ट्रिप है, मुझे नए कपड़े चाहिए। पिता किसान थे। उन्होंने कहा कि अभी हमारा सोयाबीन बिका नहीं है, जब वह बिकेगा और पैसे आएंगे, तब मैं तुम्हारे लिए कपड़े लूंगा। लेकिन इस लड़के ने देखा कि सोयाबीन तो सूख गया है, बिकेगा कैसे और पैसे कब आएंगे? बाकी सब ट्रिप पर जा रहे हैं। दोपहर के समय घर में कोई नहीं होने पर, टिन की छत के लोहे के पाइप से उसने साड़ी का फंदा बनाया और गले में फंदा डालकर आत्महत्या कर ली,चौदह साल का लड़का! एक पिता अपने बेटे को नए कपड़े नहीं दे सका। जरा कल्पना कीजिए कि जिस साड़ी को पहनने के बाद मां समझकर वह उससे लिपटता था, उसी साड़ी से फंदा लगाकर आत्महत्या करने वाले अपने बेटे को देखकर माता-पिता के मन में क्या बीती होगी? लेकिन क्या कोई उसकी सुध लेने गया? मेरे महाराष्ट्र का गरीब किसान ऐसा ही है। गरीब किसान ऐसा जीते हैं और उसके बच्चे ऐसे मरते हैं। उस युवराज ने शायद कभी खेल वाला हेलिकॉप्टर भी नहीं खरीदा होगा और हमारे यहां के गरीब किसान का बेटा पंचतारांकित खेती में हेलिकॉप्टर उड़ाता घूमता है। ये क्या ढकोसले चल रहे हैं? आप लोग क्या कर रहे हैं? और किसानों की इस मौत को देखने कोई नहीं जाता’, ऐसी तीखी आलोचना उद्धव ठाकरे ने की।
गुंडे बिश्नोई को
महाराष्ट्र लाकर दिखाएं
उद्धव ठाकरे ने कहा कि ये गुंडे उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से आए थे। जब वे वापस जाते समय पकड़े गए, तो आते समय किसी को पता क्यों नहीं चला? और उनके ऊपर जो बिश्नोई है, वह अमित शाह के गुजरात की साबरमती जेल में ढोकला और फाफड़ा खाता बैठा है। उसके गुंडे कह रहे हैं कि हमारे पास ७० हजार निशानेबाज हैं। फडणवीस जी, यदि आप में जरा भी हिम्मत है, तो साबरमती जाइए और दिल्ली में बैठे अपने आका के सामने उस बिश्नोई को घसीटकर यहां लाकर दिखाइए। फिर यहां आकर बातें कीजिए।
हाथ में तिरंगा दिखाई दिया कि सीधे अंदर डाल दो!
उद्धव ठाकरे ने सरकार से सवाल किया कि यह शहरी नक्सलवाद आखिर है क्या? मुझे स्पष्ट रूप से बताइए। ये सभी युवा सड़कों पर क्यों उतर रहे हैं? मोदी जी ने जो मुहूर्त निकाला था, वह कौन-सा मुहूर्त था? लेकिन जब ये युवा हाथों में तिरंगा लेकर निकलते हैं, तो आप उनकी तलाशी लेने लगते हैं। हाथ में तिरंगा दिखाई दिया कि सीधे अंदर डाल दो! यही तिरंगे के प्रति आपकी नफरत है।
मोहन भागवत से तीखा सवाल
मेरा मोहन भागवत जी से कोई झगड़ा नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी मेरा कोई विवाद नहीं है। लेकिन आज मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि आप पर जो आरोप लगता है कि स्वतंत्रता के बाद कई वर्षों तक आपके मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया जाता था, क्या वह नफरत आज भी कायम है? यदि आज भी तिरंगा यात्रा निकालना अपराध बन गया है, तो भागवत साहब, ‘लेकर रहेंगे आजादी’ के नारे का आखिर क्या अर्थ निकाला जाए, यह आप ही मुझे बताइए। ये युवा आक्रोशित होकर सड़कों पर उतर आए हैं। आखिर क्यों? मोहन भागवत ने अपने भाषण में कहा कि सभी आंदोलनों में शालीनता होनी चाहिए। उन्होंने ऐसा कहा है न? लेकिन शालीनता किसे दिखानी चाहिए और किसकी शालीनता कहां है, यह भी तो देखिए।
सरकार ने तो लोकतंत्र ही लूट लिया
उद्धव ठाकरे ने कहा कि दशहरे के दिन हम हमेशा सोनापान लूटने की बात करते हैं। भले ही यह सोना सांकेतिक होता है, लेकिन परंपरा है कि सोनापान लूटो, सोना लो और सोने की तरह रहो। हमारे प्रधानमंत्री कहते हैं कि सोना ही मत खरीदो। सोना लूटना तो दूर, जहां हमारा लोकतंत्र लूटा जा रहा है, जहां हमारे वोट चोरी किए जा रहे हैं, वहां और क्या लूटना बाकी रह गया है? सब कुछ लूट लिया गया है और हमें न्याय की मांग करने का अधिकार भी नहीं दिया जा रहा है। न्यायालय, सरकार, पुलिस, नौकरशाही और मुख्यमंत्री सभी के दरवाजे खटखटाने के बाद भी यदि न्याय नहीं मिलता और कोई व्यक्ति गुस्से में आकर सड़कों पर उतरता है, तो आप उसे नक्सलवादी घोषित कर देंगे? उसे गुंडा कहेंगे? यदि आपने इन युवाओं की भावनाओं को नहीं समझा, तो स्थिति बहुत खराब हो जाएगी। उद्धव ठाकरे ने यह चेतावनी दी।
आंदोलन की शालीनता कौन सिखा रहा है
उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब पहली बार दिल्ली के जंतर-मंतर पर ये युवा यानी जेन-जी, सड़कों पर उतरे, तब आपके पुलिसकर्मी भेड़ियों की तरह उन पर टूट पड़े। आप सभी ने उस लड़की का वीडियो देखा होगा। वह पुलिसकर्मी नालायक है। उसे पकड़ा जाना चाहिए। वह किस तरह लड़की के पीछे पड़ा था और उसके साथ क्या कर रहा था? इसके बावजूद आप आंदोलनकारियों को शालीनता का पाठ पढ़ाने चले हैं? किसी के बाल खींचे जा रहे हैं, किसी के कपड़े फाड़े जा रहे हैं और लोगों को जानवरों की तरह पीटा जा रहा है। हम सब यह दृश्य टेलीविजन पर देख रहे हैं।
क्रांतिकारी युवाओं को नक्सली बता रहे हैं मुख्यमंत्री
उद्धव ठाकरे ने कहा कि इसी महीने के पहले सप्ताह में महाराष्ट्र सरकार ने उच्च न्यायालय में दावा किया कि महाराष्ट्र शहरी नक्सलवादियों का केंद्र बन गया है। महाराष्ट्र के किस शहर में शहरी नक्सलवाद है? लेकिन किसी का खून नहीं खौलता। किसी को इसकी चिंता नहीं है। हमारे छत्रपति शिवाजी महाराज के महाराष्ट्र को शहरी नक्सलवाद का केंद्र कहते समय आपकी जीभ कैसे नहीं लड़खड़ाती? छत्रपति शिवाजी महाराज के महाराष्ट्र ने हर क्षेत्र में इस देश का नेतृत्व किया है। क्रांतिकारक… मुझे नहीं लगता कि देश के किसी दूसरे राज्य में महाराष्ट्र जितने क्रांतिकारी पैदा हुए होंगे। साधु-संत, इतिहासकार, साहित्यकार और लेखक आदि इस धरती पर हुए। महाराष्ट्र की एक महान परंपरा रही है, लेकिन इस परंपरा पर कलंक लगाने का काम इसी राज्य के मुख्यमंत्री कर रहे हैं।
क्रूर भेड़िए की तरह पुलिस का बर्ताव
उद्धव ठाकरे ने कहा कि हाल ही में जब राहुल गांधी ने उन युवाओं को बुलाया, तो कुछ लड़कियां भी वहां आर्इं। उनमें से एक लड़की का चेहरा तक बिगड़ गया था। उसने बताया कि उसे बुरी तरह पीटा गया, चेहरे पर घूंसे मारे गए और पेट में लातें मारी गर्इं। आपके पुलिसकर्मी इस तरह के भयानक अत्याचार कर रहे हैं और बेशर्म सरकार वहां बैठी तमाशा देख रही है। इसके बावजूद आप हमें शालीनता सिखा रहे हैं? यह सब देखकर पैरों के तलवों की आग सिर तक पहुंच जाती है। यह कहते हुए उद्धव ठाकरे ने अपना आक्रोश व्यक्त किया।
उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम लेने का अधिकार नहीं
उन्होंने कहा कि जब मेरा वोट चोरी हो रहा है, तब भी क्या मैं नपुंसक की तरह चुप बैठा रहूं और केवल ‘छत्रपति शिवाजी महाराज की जय’ बोलता रहूं? जो व्यक्ति अन्याय के खिलाफ आक्रोशित होकर खड़ा नहीं होता, उसे शिवराय का नाम नहीं लेना चाहिए। उसे बिल्कुल भी शिवराय का नाम लेने का अधिकार नहीं है। हमारे देश में लगभग १३ करोड़ नागरिकों के मतदान का अधिकार छीन लिया गया है। महाराष्ट्र की कुल आबादी लगभग साढ़े बारह से तेरह करोड़ के आसपास है। ठीक है, आपने नाम हटा दिए। लेकिन आप पहले कहते थे कि बांग्लादेशियों को यहां रहने का अधिकार नहीं है। तो क्या ये सभी १३ करोड़ लोग बांग्लादेशी हैं? उनके नाम बताइए।

 

 

 

 

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