मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
बिहार-झारखंड के चर्चित चारा घोटाले के फरार आरोपी को 25 साल बाद उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से गिरफ्तार किया गया है। चारबाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर तीन से शुक्रवार सीबीआई की रांची टीम ने बिहार के चर्चित चारा घोटाले के आरोपी को गिरफ्तार किया। वह 25 साल से फरार चल रहा था। जीआरपी थाना, चारबाग में कानूनी प्रकिया पूरी करने के बाद रात को टीम उसे अपने साथ रांची ले गई। इस मामले में बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव को कई कांडों में कोर्ट से सजा हो चुकी है। आरोपी की पहचान सत्येंद्र कुमार पुत्र योगेंद्र कुमार के रूप में हुई है। आरोप है कि उसने बिहार के पशुपालन विभाग को दस करोड़ से अधिक दवा की आपूर्ति फर्जी तरीके से की थी। रांची की विशेष अदालत से सत्येंद्र की गिरफ्तारी के लिए स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी था। उसके खिलाफ 2001 में ही चार्जशीट दायर किया गया था। तबसे वह जांच एजेंसियों को चकमा दे रहा था। सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी), रांची की टीम ने 23 अक्तूबर को तड़के 2:40 बजे उसे गिरफ्तार किया। सीबीआई की ओर से लखनऊ चारबाग जीआरपी के थाना प्रभारी को भेजे गए पत्र में गिरफ्तारी की सूचना दी गई है।
सीबीआइ को गुप्त रूप से सूचना मिली थी कि सत्येंद्र कुमार मध्य प्रदेश के गुना से ट्रेन में सवार हुआ है, उत्तर प्रदेश की ओर आ रहा है। उसके लखनऊ आने की सूचना जैसे ही सीबीआई को मिली तो आनन-फानन में एजेंसी ऐक्शन में आ गई। सीबीआई की टीम लखनऊ रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई और सिविल ड्रेस में प्लेटफॉर्म पर मुस्तैद हो गई। जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंची कि सीबीआई के अधिकारी ट्रेन में पहुंच गए और बोगी में ही आरोपी सत्येंद्र को पहचान लिया। सीबीआई ने वहीं से उसे कस्टडी में ले लिया। ट्रांजिट रिमांड लेकर उसे रांची लाया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सत्येंद्र ने अपने एक पार्टनर के साथ मिलकर कागजों पर दवा उत्पादन करने वाली कंपनी बना रखा था। उसके पार्टनर ने बी फार्मा की पढ़ाई की थी। उक्त कंपनी के माध्यम से बिहार सरकार के पशुपालन विभाग को उस समय करीब दस करोड़ कीमत की दवा की सप्लाई की गयी थी। बताया जा रहा है कि सप्लाई कागजों पर दिखाकर सरकारी खजाने से राशि की निकासी की गयी थी।
