हिमांशु राज
प्रसिद्ध शायर, गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर के लिखे गजलों को अपनी आवाज देकर गायक-संगीतकार मोहम्मद वकील ने अपने संगीत सफर में एक विशेष उपलब्धि हासिल की है। अब तक वकील जावेद अख्तर द्वारा लिखी 10 ग़ज़लों को अपनी आवाज दे चुके हैं। इन ग़ज़लों को वकील ने संगीतबद्ध भी किया है और गाया भी है और उन्हें संगीत मंच ‘गुनगुनालो’ म्यूजिक ऐप पर रिलीज किया गया है।
जावेद अख्तर मोहम्मद वकील को व्यक्तिगत रूप से बेहद सराहते हैं और अक्सर विभिन्न मंचों पर उनकी आवाज तथा स्वरों की खुलकर तारीफ करते हैं। इस अवसर पर भी उन्होंने कहा कि वकील बेहतरीन आवाज के मालिक हैं और उन्हें अब तक वो मक़ाम नहीं मिला है जिसके ये हक़दार हैं, जो उनकी प्रतिभा के अनुरूप है। अख्तर ने वकील को राष्ट्र स्तर का कलाकार और गायक बताया।
जावेद अख्तर का मानना है कि ‘गुनगुनालो’ एल्बम के बाद इतने बड़े गायक को लोग राष्ट्रीय स्तर पर जानेंगे, पहचानेंगे और सम्मान देंगे। उन्होंने आशा जताई कि उनके साथ बन रही यह एल्बम श्रोताओं को पसंद आएगी। उन्होंने कहा, “इन्होंने मेरे शब्दों को अपनी आवाज दी है। मुझे लगता है कि यह एल्बम आप लोगों को पसंद आएगी।”
इस बात का जिक्र करते हुए मोहम्मद वकील ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जावेद अख्तर साहब द्वारा उनके लिए कहे गए शब्द उनके लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अख्तर की सराहना उनके संगीत सफर का एक अनमोल पल है और वह इसे हमेशा याद रखेंगे।
वकील ने दर्शकों और श्रोताओं से अपील की है कि वे इस रील को पसंद करें, टिप्पणी करें और अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें, ताकि इस संगीत प्रस्तुति को उनका प्यार और समर्थन मिल सके।
जावेद अख्तर जैसे दिग्गज के शब्दों को अपनी आवाज देना मोहम्मद वकील के लिए निश्चित रूप से संगीत जगत में एक महत्वपूर्ण पहचान बन सकता है। साथ ही, अख्तर की लगातार सराहना उनकी कला और आवाज को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।
जावेद अख्तर द्वारा लिखी ‘बज़ाहिर क्या है जो हासिल नहीं है’, ‘हम तो बचपन में भी अकेले थे’, ‘वो ज़माना गुज़र गया कब का’, ‘दर्द के फूल’ और ‘मैं ख़ुद भी सोचता हूँ’ जैसी ग़ज़लों को मोहम्मद वकील ने अपनी आवाज दी है।
