तेहरान में चार देशों की बड़ी बैठक; अमेरिका-इजरायल के हमलों की आशंका के बीच युद्ध टालने की कवायद, होर्मुज और तेल आपूर्ति पर भी नजर
तेहरान। पश्चिम एशिया में युद्ध की आग अभी ठंडी भी नहीं पड़ी है कि नए सैन्य टकराव की आशंका ने पूरे क्षेत्र को बेचैन कर दिया है। इसी तनाव के बीच ईरान की राजधानी तेहरान में शांति की मेज सजी। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने ईरानी नेतृत्व से मुलाकात कर क्षेत्रीय तनाव कम करने और बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है।
सोमवार को हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्किये के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन शामिल हुए। प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई से बातचीत की। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर नए हमलों की आशंका बनी हुई है। दूसरी तरफ यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। बैठक के बाद चारों देशों ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए संवाद जारी रखने की सहमति जताई। हालांकि, किसी युद्धविराम, सैन्य समझौते अथवा हूती हमले रोकने पर ठोस समझौते की घोषणा नहीं हुई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बातचीत की यह पहल पश्चिम एशिया को एक और विनाशकारी युद्ध से बचा पाएगी? पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से अमेरिका तथा ईरान के बीच संवाद बहाल करने की कोशिशें भी चल रही हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और तेल आपूर्ति की सुरक्षा प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं।
इस घटनाक्रम पर भारत की भी नजर है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और ऊर्जा आयात पर दबाव पड़ सकता है। फिलहाल कूटनीति ने उम्मीद का दरवाजा जरूर खोला है, लेकिन बंदूकें खामोश कराने के लिए केवल बैठकों से काम नहीं चलेगा। शांति की असली परीक्षा तब होगी, जब बातचीत के साथ हमले भी रुकेंगे।
