-१२० सदस्यीय संसद के लिए चुनाव; सुरक्षा, युद्ध की जवाबदेही और गठबंधन राजनीति निर्णायक मुद्दे
तेल अवीव। इजरायल में मंगलवार को आम चुनाव के लिए मतदान हुआ। सात अक्टूबर २०२३ के हमले और उसके बाद लंबे क्षेत्रीय संघर्षों के बीच यह चुनाव प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
इजरायल की संसद नेसेट में १२० सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए सामान्यतः कम से कम ६१ सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। चुनाव में नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट सहित विपक्षी नेताओं के बीच मुकाबला है।
युद्ध और सुरक्षा मुख्य मुद्दे
मतदाताओं के सामने राष्ट्रीय सुरक्षा, गाजा युद्ध, सात अक्टूबर के हमले की जवाबदेही और क्षेत्रीय संबंधों जैसे प्रश्न हैं। नेतन्याहू के समर्थक उनके सुरक्षा संबंधी रुख पर जोर देते हैं, जबकि विरोधी उनके नेतृत्व और सरकारी निर्णयों की आलोचना कर रहे हैं। इजरायल में अति-रूढ़िवादी समुदायों के लिए सैन्य भर्ती संबंधी छूट भी विवाद का विषय है।
भारत पर क्या असर?
भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि, तकनीक और सुरक्षा संबंधी सहयोग है। नई सरकार की क्षेत्रीय नीति का प्रभाव पश्चिम एशिया की कूटनीति और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। हालांकि चुनाव परिणाम आने से पहले किसी सरकार के गठन या नीति परिवर्तन को निश्चित मानना उचित नहीं होगा।
