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५ हजार रुपए की राहत से नहीं माने किसान…१२ हजार अन्नदाताओं का मुंबई की ओर कूच!

सामना संवाददाता / मुंबई

सूखे की मार, कर्ज का बोझ और सरकारी राहत से असंतुष्ट महाराष्ट्र के किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है। अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में १२ हजार से अधिक किसानों ने इगतपुरी से मुंबई की ओर कूच शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि सरकार की ५ हजार रुपए की राहत उनके वास्तविक नुकसान के सामने नाकाफी है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में पर्याप्त सूखा मुआवजा, संपूर्ण कर्जमाफी, लंबित फसल बीमा भुगतान और वनभूमि पर खेती करने वाले आदिवासी किसानों के अधिकार शामिल हैं।
सवाल यह है कि जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और मौसम की मार से फसलें बर्बाद हो रही हैं, तब मामूली राहत देकर सरकार किसानों को कब तक संतुष्ट करने की उम्मीद रखेगी? मुख्यमंत्री से किसान प्रतिनिधिमंडल की बातचीत अपेक्षित है। लेकिन किसानों का मुंबई कूच स्पष्ट संकेत है कि राहत की घोषणाओं और खेतों की वास्तविक स्थिति के बीच गंभीर अंतर बना हुआ है।
जनवरी २०२२ से जून २०२६ के बीच किसानों की आत्महत्या के मामलों की संख्या कुछ रिपोर्टों में १३,९२८ और अन्य में १३,१२८ बताई गई है। सरकारी सहायता के पात्र मामलों की संख्या भी अलग-अलग प्रकाशित हुई है। आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र घाडगे का आरोप है कि राहत एवं पुनर्वास विभाग ने जिलावार आंकड़े देने से इनकार कर दिया। इससे यह जानना मुश्किल हो रहा है कि किन जिलों में संकट सबसे गंभीर है। विभागीय प्रक्रिया के अनुसार, सहायता की पात्रता जांच के बाद तय होती है। लेकिन सवाल है कि जब आंकड़ों में ही विसंगति है, तो राहत की वास्तविक स्थिति का आकलन वैâसे होगा? सरकार को मूल आंकड़े सार्वजनिक कर स्पष्ट करना चाहिए कि ८०० मामलों का अंतर आखिर क्यों है।
-किसानों की मौत का हिसाब भी उलझा!
-सरकारी आंकड़ों में ८०० का अंतर
महाराष्ट्र में किसान आत्महत्याओं का सिलसिला थम नहीं रहा, लेकिन अब उनकी मौत के आंकड़ों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त आंकड़ों पर आधारित अलग-अलग समाचार रिपोर्टों में ८०० मामलों का अंतर सामने आया है।

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