सामना संवाददाता / नई दिल्ली
शिवसेना से बगावत करने वाले छह गद्दार सांसदों का भविष्य अधर में लटक गया है। गद्दार सांसदों के विलय को चुनौती देने वाली शिवसेना की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को गंभीर संज्ञान लिया। याचिका में प्रतिवादी बनाए गए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कहां हैं? ऐसा कड़ा सवाल न्यायालय ने किया और यह स्पष्ट किया कि शिवसेना की याचिका पर जल्द ही अंतिम पैâसला सुनाया जाएगा। इसके अनुसार, ८ दिसंबर को अंतिम सुनवाई तय की गई है। इस वजह से बगावत करने वाले सांसदों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
शिवसेना पार्टी और चुनाव चिह्न के मामले में सुनवाई आज
शिवसेना पार्टी और चुनाव चिह्न `धनुष-बाण’ के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष मंगलवार को पार्टी-चिह्न का मामला लिस्टेड था, लेकिन समय की कमी के कारण इस पर सुनवाई नहीं हो सकी। शाम को कामकाज समाप्त होने के समय अदालत ने स्पष्ट किया कि शिवसेना मामले की अगली सुनवाई बुधवार को की जाएगी। इस सुनवाई में गद्दार विधायकों की अयोग्यता पर बहस शुरू होने की संभावना है। शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी है, जबकि पार्टी के मुख्य सचेतक, विधायक सुनील प्रभु ने गद्दार विधायकों को अयोग्य ठहराने के बजाय योग्य ठहराने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है।
गद्दार सांसदों द्वारा शिंदे गुट में विलय के लिए की गई मांग को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंजूरी दी थी। उनका यह निर्णय असंवैधानिक होने का दावा करते हुए शिवसेना के लोकसभा संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने रिट याचिका दायर की है। इस पर मंगलवार को न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के सामने सुनवाई हुई। इससे पहले जुलाई में पीठ ने इन छह सांसदों सहित अध्यक्ष बिरला को नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद बिरला का पक्ष रखने के लिए अदालत में कोई उपस्थित नहीं हुआ। इस पर शिवसेना की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कड़ा एतराज जताया। इसी दौरान अदालत ने `लोकसभा अध्यक्ष कहां हैं?’ यह तीखा सवाल पूछा और नोटिस जारी होने के बाद भी अनुपस्थित रहने के आचरण को गंभीरता से लेते हुए याचिका को सीधे अंतिम निपटारे के लिए बोर्ड पर लेने की तैयारी जताई। इसके मुताबिक, ८ दिसंबर को अंतिम सुनवाई करने की घोषणा की गई। न्यायालय के इस सख्त रुख से लोकसभा अध्यक्ष के साथ-साथ गद्दार सांसदों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
