-सिर्फ १३ दस्तावेज स्वीकार करने की बाध्यता पर न्यायाधिकरणों ने उठाए सवाल;
-आधार लॉगिन और आदेश दर्ज करने की व्यवस्था में भी सुधार का आश्वासन
सामना संवाददाता / कोलकाता
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की अपीलों की सुनवाई के लिए बनाए गए न्यायाधिकरणों और चुनाव आयोग के बीच तकनीकी नियमों को लेकर पैदा हुआ गतिरोध अब दूर होने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल में न्यायाधिकरणों के न्यायाधीशों की आपत्तियों के बाद निर्वाचन आयोग अपने ऑनलाइन पोर्टल में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है।
विवाद की शुरुआत पोर्टल पर केवल १३ निर्धारित दस्तावेजों को स्वीकार करने की व्यवस्था से हुई थी। न्यायाधीशों का कहना है कि किसी अपील का न्यायसंगत निपटारा करने के लिए सभी प्रासंगिक और स्वीकार्य दस्तावेजों पर विचार करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने मार्च २०२६ में एसआईआर न्यायाधिकरणों के गठन का आदेश देते हुए १३ दस्तावेजों का उल्लेख किया था, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया था कि यह सूची केवल संकेतात्मक है, अंतिम या संपूर्ण नहीं। न्यायाधिकरणों ने पोर्टल में आधार आधारित प्रमाणीकरण की अनिवार्यता पर भी आपत्ति जताई थी। अब आयोग डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से आदेश दर्ज करने की सुविधा देने पर विचार कर रहा है।
सबसे गंभीर तथ्य यह है कि २१ सितंबर को नया पोर्टल शुरू होने के बाद से न्यायाधिकरणों के न्यायाधीश एक भी आदेश अपलोड नहीं कर सके हैं। तकनीकी व्यवस्था पर गतिरोध के कारण अपीलों के औपचारिक निस्तारण की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
आयोग के आश्वासन वास्तविक सुधारों में कब बदलेंगे?
मुर्शिदाबाद की अपीलें सुन रहे कलकत्ता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश इंद्रजीत चटर्जी ने पहले दो नवंबर से काम छोड़ने की बात कही थी। आयोग के सुधार संबंधी आश्वासन के बाद उन्होंने सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया है। न्यायाधिकरणों को किसी अधिक सुविधाजनक स्थान पर स्थानांतरित करने की संभावना भी विचाराधीन है। अब प्रश्न यह है कि चुनाव आयोग के आश्वासन वास्तविक तकनीकी सुधारों में कब बदलेंगे और लंबित अपीलों के आदेश कब से दर्ज होने लगेंगे।
