एम एन एस
मध्य प्रदेश के रतलाम स्थित प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में धनतेरस के अवसर पर करोड़ों रुपये की नकदी और सोने-चांदी के आभूषणों से विशेष सजावट की गई है। श्रद्धालु अपनी नकदी और गहने मंदिर में सजावट के लिए जमा कराते हैं। इन्हें निर्धारित प्रक्रिया के बाद वापस कर दिया जाता है। मंदिर में धन की इस अनोखी सजावट को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। आमतौर पर मंदिरों में फूलों और रोशनी से सजावट होती है, लेकिन यहां नोटों की गड्डियां और गहने भी श्रृंगार का हिस्सा बनते हैं। इस परंपरा के कारण मंदिर की सुरक्षा और जमा वस्तुओं के रिकॉर्ड का विशेष महत्व है। बैंक में नोट जमा कराओ तो ब्याज मिलता है, यहां श्रद्धालु आस्था के साथ नोट सजवाने आते हैं। धनतेरस पर महालक्ष्मी का यह दरबार रतलाम की विशिष्ट पहचान बन चुका है।
जंगल बचाने के लिए २२ करोड़ खर्च, जांच में न तार मिला, न गड्ढा!
छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण के नाम पर करीब २२ करोड़ रुपये के खर्च से जुड़ी कथित अनियमितताओं ने विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छह नवंबर को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, जिन स्थानों पर संरक्षण संबंधी काम होने का दावा किया गया, वहां निरीक्षण में अपेक्षित तारबंदी और गड्ढे तक नहीं मिले। मामला और दिलचस्प तब हो गया जब करीब साढ़े तीन लाख रुपये की वसूली का नोटिस एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को दिए जाने की बात सामने आई। सवाल उठ रहा है कि यदि काम वास्तव में नहीं हुआ तो भुगतान किस आधार पर हुआ और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की गई? आरोपों की विभागीय जांच और संबंधित अधिकारियों का पक्ष महत्वपूर्ण है। सरकारी फाइल में जंगल की सुरक्षा पर करोड़ों खर्च हो गए, मगर जमीन पर तार और गड्ढे खोजने पड़ रहे हैं! अब जांच को यह बताना होगा कि पैसा कहां गया और काम की पुष्टि किसने की।
दिवाली की मिठाई में मिलावट, हर छठा सैंपल फेल; फिर भी दुकानें चालू!
छत्तीसगढ़ में त्योहार के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए हैं। छह नवंबर को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक जांचे गए खाद्य नमूनों में लगभग हर छह में से एक नमूना निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा। खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर करीब ८३ लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद कार्रवाई के बाद प्रतिष्ठानों के दोबारा संचालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। दिवाली में ग्राहक मिठाई खरीदते समय स्वाद, रंग और कीमत देखता है, लेकिन प्रयोगशाला की रिपोर्ट दुकान के काउंटर पर नहीं मिलती। विभाग को स्पष्ट करना होगा कि कितने नमूने असुरक्षित पाए गए, कितने केवल गुणवत्ता मानकों पर फेल हुए और किन प्रतिष्ठानों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई हुई।
आखिर जुर्माना भरकर फिर वही गड़बड़ी जारी रहे तो मिठाई से ज्यादा मीठा कारोबार मिलावट करने वालों का हो जाएगा!
