-कॉकरोच दौड़ाए गए तो सरकार दौड़ी
-बगरू में सीजेपी टीम पर हमले के बाद गरमाया स्कूलों का मुद्दा
-भजनलाल सरकार ने तीन साल में सरकारी स्कूलों के कायाकल्प की योजना बनाई
राजस्थान में कॉकरोच जनता पार्टी के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का असर अब सरकारी पैâसलों में दिखाई देने लगा है। जयपुर के बगरू क्षेत्र में स्कूल की हालत देखने पहुंची सीजेपी टीम के साथ मारपीट और उन्हें दौड़ाए जाने की घटना के बाद सरकारी स्कूलों की बदहाली बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई। अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार ने सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए १२,५०० करोड़ रुपए का तीन वर्षीय रोडमैप तैयार किया है।
सरकार के मुताबिक, यह योजना २०२६-२७ से २०२८-२९ तक चलेगी। इसके तहत स्कूल भवनों की मरम्मत, नए निर्माण और आधारभूत सुविधाओं में सुधार किया जाएगा। दिसंबर २०२६ तक १,०८७ करोड़ रुपए की लागत से ९,००० स्मार्ट क्लासरूम, ८०,००० टैबलेट और ७,००० आईसीटी लैब स्थापित करने की योजना भी बताई गई है। बगरू विवाद के बाद सरकार ने यह भी स्वीकार किया था कि राजस्थान में ६११ सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है और बड़ी संख्या में स्कूल शौचालय तथा पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं। रामपुरा क्षेत्र के विवादित स्कूल के लिए अलग से नया भवन बनाने का पैâसला भी लिया गया है। सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सरकार के पैâसले को ‘कॉकरोच इज बैक’ आंदोलन की बड़ी जीत बताया। हालांकि उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि सरकार ने मार्च २०२६ में हाई कोर्ट के सामने भी इसी तरह का रोडमैप होने की बात कही थी, तब पांच वर्ष का समय मांगा गया था और अब इसे तीन वर्ष में पूरा करने की बात कही जा रही है।
राजस्थान से यूपी तक जेन अल्फा ने सरकारों को झुकाया!
स्कूलों की बदहाली पर जेन-अल्फा और जेन-जी की आवाज अब सोशल मीडिया से निकलकर सरकारों के पैâसलों तक पहुंचती दिख रही है। राजस्थान ने सरकारी स्कूलों के इंप्रâास्ट्रक्चर के लिए १२,५०० करोड़ रुपए का रोडमैप बनाया है, जबकि यूपी में ३,१२६ स्कूलों के कायाकल्प पर ६०४ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। मरम्मत के लिए ३०२ करोड़ रुपए की पहली किस्त भी जारी हो चुकी है। जर्जर इमारतें, खराब सुविधाएं और स्कूल भवनों की कमी लंबे समय से सवालों के घेरे में थीं।
