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रेलवे की थाली में ‘मौत की सौगात’! …कांदिवली स्टेशन के समोसे में निकली लोहे की कील

-रेलवे कैंटीनों की खाद्य सुरक्षा के दावों की खुली पोल

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई की उपनगरीय रेल सेवा से रोजाना लाखों यात्रियों का सफर जुड़ा है, लेकिन रेलवे परिसरों में बिकनेवाले खाद्य पदार्थ कितने सुरक्षित हैं, इस पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कांदिवली रेलवे स्टेशन पर बिक रहे एक समोसे में करीब डेढ़ इंच लंबी लोहे की कील मिलने की घटना ने रेल प्रशासन की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
जानकारी के अनुसार, एक यात्री ने कांदिवली रेलवे स्टेशन स्थित खाद्य स्टॉल से समोसा खरीदा था। समोसा खाते समय उसे अंदर कोई कठोर वस्तु महसूस हुई। जब उसने समोसे को खोलकर देखा तो उसमें लोहे की एक बड़ी कील फंसी हुई थी। यह देखकर यात्री स्तब्ध रह गया। यदि यह कील गलती से निगल ली जाती, तो गले, पेट या आंतों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता था और एक बड़ा हादसा भी हो सकता था। घटना ने रेलवे स्टेशनों पर बिकनेवाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनकी जांच प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सवाल यह है कि समोसा तैयार करने से लेकर यात्रियों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में इतनी बड़ी लापरवाही वैâसे नजरअंदाज हो गई? क्या खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांच केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है?
शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन
घटना के बाद संबंधित यात्री ने स्टॉल संचालक और रेल प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही अधिकारियों ने जांच शुरू करने का दावा किया है तथा खाद्य सामग्री तैयार करने वाली इकाई की जांच के निर्देश दिए हैं। हालांकि, यात्रियों का कहना है कि अक्सर ऐसी घटनाओं के बाद केवल जांच का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन व्यवस्था में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं देता। मुंबई के रेलवे स्टेशनों पर प्रतिदिन लाखों यात्री भोजन और नाश्ते के लिए स्टेशन परिसर के स्टॉलों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में खाने की वस्तुओं में लोहे की कील जैसी खतरनाक चीज मिलना यात्रियों की सुरक्षा के प्रति घोर लापरवाही को दर्शाता है। इससे यह भी सवाल उठता है कि रेल प्रशासन यात्रियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर कितना गंभीर है।

सख्त कार्रवाई की मांग
यात्रियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि रेलवे स्टेशनों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों की नियमित एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही इस मामले में दोषी पाए जाने वाले स्टॉल संचालकों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में यात्रियों की जान से इस तरह का खिलवाड़ दोबारा न हो सके।

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