अनिल मिश्र/पटना
किलकारी बिहार बाल भवन, गया जी में आयोजित चार दिवसीय बाल दिवस सप्ताह (18–20 नवंबर 2025) का आज उत्साह, उमंग और सृजनात्मकता के बीच भव्य समापन हुआ। मुख्य अतिथि वरीय उप समाहर्ता श्रीमती नेहा कुमारी सखी वन स्टॉप सेंटर समाज कल्याण विभाग प्रभारी आरती कुमारी. ने दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया और बच्चों को शुभकामनाएँ दीं।कार्यक्रम की शुरुआत बारह विद्यालयों के बच्चों की विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिनमें नृत्य, नाटक, समूह-गायन, एकल-नृत्य तथा कला-आधारित मंचन शामिल रहे। किलकारी के बच्चों द्वारा प्रस्तुत “गया कि को महिमा ” का अद्भुत प्रदर्शन दर्शकों की विशेष सराहना का पात्र बना।

पूरे कार्यक्रम में 1200 से अधिक बच्चों ने भाग लेकर बाल दिवस को यादगार बना दिया।बाल दिवस के अवसर पर पूरे कैंपस में बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के झूले लगाए गए थे, जिससे बच्चों में अपार उत्साह देखने को मिला।बच्चों ने स्वयं अपने रचनात्मक स्टॉल लगाए, जिनमें—हस्तकला,मूर्ति कला,पेंटिंग,चित्रकला,पेपर क्राफ्ट, सजावटी वस्तुएँ जैसे आकर्षक प्रदर्शन शामिल थे।
स्टॉल के माध्यम से बच्चों ने अपनी कला, मेहनत और नवाचार का शानदार प्रदर्शन किया। विशेष आकर्षण रहा बच्चों के लिए लगाया गया बाइस्कोप, जो विलुप्त होती पारंपरिक कला का अद्भुत उदाहरण है। इस पुराने मनोरंजन माध्यम ने बच्चों और अभिभावकों को पुरानी यादों से भर दिया। कैंपस में फूड स्टॉल भी लगाए गए, जिनमें बच्चों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया। प्रतिभाओं का सम्मान—बच्चों से लेकर प्रशिक्षकों तकसमारोह के दौरान किलकारी के 10 उत्कृष्ट बच्चों को “स्पार्क ऑफ किलकारी सम्मान” प्रदान किया गया, जो उनकी प्रतिभा, रचनात्मकता और अनुशासन के लिए दिया जाता है। साथ ही—गोविंद कुमार,ललिता कुमारी को कुशल प्रशिक्षक सम्मान प्रदान किया गया।इसके अतिरिक्त कल्पना सिंह को कुशल कर्मी सम्मान से सम्मानित किया गया।किलकारी के बच्चों की प्रतिभा ने जीता सभी का दिल दो दिनों तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रम, कला प्रदर्शनियों, झूलों, स्टॉलों और बच्चों की विविध गतिविधियों ने पूरे कार्यक्रम को अद्भुत और अविस्मरणीय बना दिया। किलकारी परिसर बच्चों की हँसी, संगीत और रंगों से सराबोर हो उठा।किलकारी बिहार बाल भवन, गया जी द्वारा आयोजित यह बाल दिवस सप्ताह न सिर्फ बच्चों की प्रतिभा का मंच बना, बल्कि उनके आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मकता और कला को एक नई दिशा देने का प्रयास भी रहा।यह कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास और उनके उज्ज्वल भविष्य के प्रति किलकारी की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।
