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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले आदित्य ठाकरे…यही भारत की ताकत है!.. केंद्र सरकार के सामने रखीं तीन मांगें

`आदित्य ठाकरे ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ही पर्याप्त नहीं है। छात्रों पर हुई कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी तय करना, सरकार की ओर से माफी मांगना और आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना भी जरूरी है।’

सामना संवाददाता / मुंबई

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले ३५ दिनों से जारी छात्रों और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आंदोलन के बाद आखिरकार आंदोलनकारियों को बड़ी सफलता मिली है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में उठे विरोध और बढ़ते जनदबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे भारत की ताकत बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि यही भारत की ताकत है।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो चुका है, लेकिन अब सरकार को उन तीन महत्वपूर्ण सवालों का जवाब देना चाहिए, जो इस पूरे आंदोलन से जुड़े हुए हैं। आदित्य ठाकरे ने मांग की कि युवा भारतीयों पर किए गए कथित अमानवीय लाठीचार्ज के लिए भाजपा सरकार को देश के युवाओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। दूसरी उन्होंने यह भी मांग की कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया, इसकी निष्पक्ष जांच की जाए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए। तीसरी मांग रखते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि सरकार की कथित क्रूर कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाने वाले भारतीयों और आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जानी चाहिए। बता दें कि छात्रों के समर्थन में पूरा देश सड़क पर उतर गया था। महाराष्ट्र में शिवसेना ने छात्रों के समर्थन में खुलकर आंदोलन शुरू किया था। दादर में छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क में शिवसेना के युवासेना की ओर से लगातार आंदोलन किया गया। आंदोलन करनेवाले छात्रों को पुलिस केस से बचाने के लिए वकीलों की टीम तैयार कर काम पर लगाई गई। छात्र आंदोलन के समर्थन में राज्य के लगभग सभी राजनीतिक दलों और तमाम सम्मानित लोगों में केंद्र सरकार की जमकर आलोचना की, जिसके बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में धर्मेंद्र प्रधान को एक प्रभावशाली और महत्वपूर्ण मंत्री माना जाता था। उनके इस्तीफे के बाद साफ हो गया है कि देश में युवाओं के सामने केंद्र की मोदी सरकार झुक गई है। घमंड में चूर मोदी सरकार की अकड़ को युवाओं ने तोड़ दिया है।

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