फिरोज खान
ठाणे के होटल में तकिये से गला घोंटकर हुई हत्या हो या हर हफ्ते अखबारों में छपने वाली ऑनर किलिंग की खबरें। एक बात साफ है कि नाजायज रिश्ते और शक आज कत्ल की सबसे बड़ी वजह बनते जा रही हैं। डोंबिवली के नंदकिशोर और लातूर की महिला ५ साल से रिलेशन में थे। महिला शादीशुदा थी और पति से अलग रह रही थी। दोनों सोशल मीडिया से मिले और होटलों में मिलना शुरू किया। कुछ दिनों से नंदकिशोर को शक था कि महिला किसी और से बात करती है। फोन पर घंटों बातचीत ने शक को यकीन में बदल दिया। बहस हुई और गुस्से में उसने हत्या कर दी। ये अकेली घटना नहीं है। रिश्तों में पारदर्शिता न होने, छुप-छुपकर मिलने और समाज के दबाव की वजह से शक, गुस्सा और हिंसा बढ़ती जा रही है।
क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे कत्ल
सोशल मीडिया और फोन ने शक को हवा दी है। `किससे बात कर रही हो’ से शुरू होकर बात खून तक पहुंच जाती है। छुपा हुआ रिश्ता जब परिवार और समाज से छुपाकर रखा जाए तो तनाव बढ़ता है। छोटी बात भी बड़ा झगड़ा बन जाती है। पुरुष अक्सर `इज्जत’ और `कंट्रोल’ के नाम पर हिंसा को जायज समझ लेते हैं। शादीशुदा होकर अफेयर करने पर सामाजिक बदनामी का डर रिश्ते को और जहरीला बनाता है।
समाधान और सुझाव
रिश्ते में शक हो तो हिंसा नहीं, बात करें। जरूरत पड़े तो काउंसलिंग लें। गुस्सा आए तो वहां से हट जाएं। १० मिनट रुकने से कई जानें बच सकती हैं। घरेलू हिंसा और हत्या दोनों अपराध हैं। पुलिस हेल्पलाइन ११२ और महिला हेल्पलाइन १८१ पर मदद लें। पार्टनर का फोन चेक करना या जासूसी करना भरोसा तोड़ता है। `इज्जत के नाम पर खून’ को ग्लोरिफाई करना बंद करें। इससे रिश्ते टूट सकते हैं, लेकिन जान लेना समाधान नहीं। प्यार आजादी मांगता है, वैâद नहीं। शक का इलाज हिंसा नहीं है। अगर रिश्ते में भरोसा नहीं बचा तो अलग होना बेहतर है, कत्ल नहीं। वरना नाजायज रिश्ते की कीमत दो जिंदगियों और जेल से चुकानी पड़ेगी।
