-डॉ. बालकृष्ण मिश्र
गुरुजी, मैं डॉक्टर बनना चाहता हूं। दो बार नीट की परीक्षा दे चुका हूं, लेकिन सफलता नहीं मिली। अड़चन क्यों आ रही है, कृपया उपाय बताएं?
-पीयूष दुबे
(जन्म: ८ अगस्त २००३, रात्रि ३:५७ बजे, स्थान: करौदी, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश)
पीयूष जी, आपका जन्म शुक्रवार को ज्येष्ठा नक्षत्र, तृतीय चरण में हुआ है। आपकी राशि वृश्चिक और कर्क लग्न है। कर्क लग्न के स्वामी चंद्रमा नीच राशि में पंचम भाव में केतु के साथ विराजमान हैं। पंचम भाव के स्वामी मंगल अष्टम भाव में बैठकर राहु को देख रहे हैं। इस स्थिति से स्पष्ट है कि आप डॉक्टर बन सकते हैं। लेकिन लग्नेश चंद्रमा के नीच और केतु युक्त होने से मन एकाग्र नहीं रह पाता। साथ ही आपकी कुंडली में कालसर्प योग भी है। इसी कारण परीक्षा के समय तैयारी पूरी होने के बाद भी सफलता में बाधा आ रही है। वैदिक विधि से कालसर्प दोष की शांति ३ बार अवश्य करवाएं। इससे एकाग्रता और सफलता के योग बनेंगे। जीवन के संपूर्ण विस्तार के लिए आप संपूर्ण जीवन दर्पण गोल्ड भी बनवा सकते हैं।
गुरु जी, बहुत समय से समय अनुकूल नहीं चल रहा है। कोई उपाय बताएं जो बेहतर हो।
– अशोक जैन
(जन्म: १४ सितंबर १९५७, प्रात: ७:५० बजे। स्थान: जोधपुर, राजस्थान)
अशोक जी, आपका जन्म शनिवार को भरणी नक्षत्र, तृतीय चरण में हुआ है। राशि मेष और कन्या लग्न है। आपकी कुंडली में पंचम और षष्ठ भाव के स्वामी शनि पराक्रम भाव में हैं। शनि की महादशा २६ मार्च २०२२ से चल रही है। धन भाव में भाग्येश शुक्र के साथ राहु बैठकर कालसर्प योग बना रहे हैं। वहीं मेष राशि में चंद्रमा के साथ केतु की स्थिति और अष्टम भाव का कालसर्प योग जीवन में असुविधा दे रहा है। बुधवार से शुरू करके ४३ दिन तक प्रतिदिन ३०० ग्राम आटे में थोड़ा मीठा मिलाकर छोटी गोलियां बनाएं और तालाब या नदी में मछलियों को खिलाएं। साथ ही प्रतिदिन ३ बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे धीरे-धीरे राहत मिलेगी। विस्तृत जानकारी के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण गोल्ड बनवाएं।
