मुख्यपृष्ठनए समाचारघुटनों पर मोदी सरकार!..छात्र आंदोलन का दबाव या २०२९ की रणनीति?

घुटनों पर मोदी सरकार!..छात्र आंदोलन का दबाव या २०२९ की रणनीति?

-धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर उठे बड़े सवाल
-१२ साल में तीसरी बार झुकी केंद्र सरकार

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

छात्र आंदोलन के बढ़ते दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह युवाओं की नाराजगी का असर है या २०२९ चुनाव से पहले सरकार की बड़ी रणनीति?
बता दें कि मोदी सरकार को पिछले १२ वर्षों में तीसरी बार जनआंदोलन के सामने पीछे हटने पर मजबूर किया। इससे पहले नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी यानी सीएए और एनआरसी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन तथा तीन कृषि कानूनों के विरोध में चले किसान आंदोलन ने भी सरकार को अपने कदम वापस लेने के लिए विवश किया था।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लग रहा था कि छात्र आंदोलन उनकी व्यक्तिगत छवि पर भी असर डाल रहा है। लोकसभा चुनाव २०२९ से पहले वह किसी भी स्थिति में यह संदेश नहीं जाने देना चाहते थे कि केंद्र सरकार युवाओं की चिंताओं के प्रति असंवेदनशील है। इसी रणनीति के तहत धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का फैसला लिया गया। धर्मेंद्र प्रधान को शुक्रवार देर रात ही संकेत दे दिया गया था कि उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा। इसके बाद शनिवार सुबह करीब ९ बजे उन्होंने अपना इस्तीफा भेज दिया। इस्तीफे की जानकारी सार्वजनिक होने और धर्मेंद्र प्रधान के `एक्स’ पर पोस्ट करने से पहले गृह मंत्री अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान के बीच करीब आधे घंटे तक बैठक हुई।
`अब पीएम मोदी की बारी है’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म `एक्स’ पर लिखा, `भारत के `छात्रों की आवाज’ आखिरकार उस अहंकारी सत्ता के दरवाजे तक पहुंच ही गई है। अब पीएम मोदी की बारी है कि वे हमारी युवा पीढ़ी से माफी मांगें और उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें जिन्होंने उन पर लाठियां और पैलेट गन चलार्इं।’
‘भ्रष्टाचार के प्रतीक हैं, उनको तो जाना ही था…राहुल गांधी की तीखा हमला
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद लोकसभा में विपक्ष और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह हमारे छात्रों की जीत है। यही भारत का भविष्य है। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधान एक प्रतीक हैं, भ्रष्टाचार का प्रतीक, शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने का प्रतीक, अक्षमता का प्रतीक। उन्हें जाना ही था और अच्छा हुआ कि वो चले गए।
‘सिर्फ इस्तीफे से नहीं बनता देश–सोनम वांगचुक
`मैं सरकार और धर्मेंद्र प्रधान के फैसले का स्वागत और सम्मान करता हूं। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा है कि देश सिर्फ इस्तीफे से नहीं बनता। बल्कि शिक्षा में भी सुधार होना चाहिए।
खत्म हुआ छात्र आंदोलन–सीजेपी
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ समय बाद सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिायों के बीच शनिवार को एक और बैठक हुई। मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्प्रâेंस कर सीजेपी ने एलान किया कि सरकार ने उनकी सभी मांगें मान ली हैं और अब वो अपना आंदोलन वापस ले रहे हैं।

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