-‘शरीर रिटायर, डिजिटल अवतार कमाई पर’
वायर्ड की रिपोर्ट बताती है कि एडल्ट इंडस्ट्री में अब कई कलाकार अपने एआई क्लोन या डिजिटल ट्विन बनवा रहे हैं। इसका मकसद है, उम्र बढ़ने, रिटायरमेंट, शूटिंग की शारीरिक थकान और कंटेंट की सीमाओं से बाहर जाकर लंबे समय तक कमाई जारी रखना। रिपोर्ट में पूर्व एडल्ट स्टार लीसा एन का उदाहरण दिया गया है, जिन्होंने २०१९ में पॉर्न इंडस्ट्री छोड़ दी थी, लेकिन अब उनके एआई संस्करण के साथ पैंâस ऑनलाइन इंटरैक्ट कर सकते हैं। इस ट्रेंड के पीछे ओहचैट, सिनफुलएक्स एआई और जॉय एआइ जैसे प्लेटफॉर्म हैं, जो दावा करते हैं कि वे ‘कंसेंट-बेस्ड’ यानी कलाकार की सहमति और नियंत्रण वाले एआई अवतार बना रहे हैं। इन डिजिटल क्लोन में कलाकार की आवाज, चेहरा, शैली और व्यक्तित्व की नकल की जाती है। इससे कलाकार बिना रोज शूट किए, बिना शारीरिक उपस्थिति के और कई बार रिटायरमेंट के बाद भी कमाई कर सकते हैं।
रिपोर्ट का सबसे बड़ा सवाल है, जब असली शरीर बूढ़ा होगा, तब डिजिटल शरीर हमेशा जवान रहेगा। इसलिए एडल्ट इंडस्ट्री में यह तकनीक केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि ब्रांड, अधिकार, पहचान और कमाई का नया मॉडल बन रही है। कुछ कलाकार इसे अपनी छवि पर नियंत्रण और आय के नए स्रोत के रूप में देख रहे हैं। वहीं आलोचकों का डर है कि इससे डीपफेक, पहचान की चोरी, सहमति की सीमाएं और असली-नकली की पहचान जैसे सवाल और उलझ सकते हैं।
यह बदलाव केवल पॉर्न इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है। हाल में कई इन्फ्लुएंसर और डिजिटल क्रिएटर भी अपने एआई क्लोन बना रहे हैं, ताकि वे लगातार कंटेंट, विज्ञापन और पैâन इंटरैक्शन कर सकें। लेकिन इससे प्रामाणिकता, नैतिकता और कलाकार की डिजिटल पहचान पर गंभीर बहस शुरू हो गई है।
एडल्ट इंडस्ट्री में एआई क्लोन का प्रवेश बताता है कि भविष्य में कलाकार की ‘देह’ से ज्यादा उसकी ‘डिजिटल पहचान’ बिकेगी। यह तकनीक कलाकार को लंबी कमाई और नियंत्रण दे सकती है, लेकिन गलत हाथों में यह डीपफेक शोषण, निजता के उल्लंघन और डिजिटल गुलामी का हथियार भी बन सकती है।
