डबलिन पुलिस ने रोबो कॉप को नौकरी से निकाला
सामना संवाददाता / मुंबई
एआई और रोबोटिक्स को पुलिसिंग का फ्यूचर माना जा रहा है। दुनिया के कई शहरों में पुलिस की मदद के लिए एआई रोबोट तैनात किए जा रहे हैं। लेकिन अमेरिका के ओहायो राज्य के डबलिन शहर में चलाया गया एक ऐसा ही एक्सपेरिमेंट उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। करीब एक साल तक ड्यूटी करने के बाद शहर के एआई रोबोट पुलिसकर्मी ‘डबबॉट’ को नौकरी से निकाल दिया गया।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस रोबोट ने अपनी पूरी ड्यूटी के दौरान न तो किसी अपराधी को पकड़वाया, न किसी की गिरफ्तारी में मदद की और न ही एक भी चालान कटवाया। इसके बावजूद इस प्रोजेक्ट पर शहर को करीब ६३ लाख रुपए खर्च करने पड़े। डबबॉट असल में अमेरिका की एक टेक कंपनी का के५ ऑटोनोमस सिक्योरिटी रोबोट था। इसे जुलाई २०२५ में डबलिन शहर के रॉक क्रेस पार्विंâग गैरेज में तैनात किया गया था। बाद में इसे शहर के दूसरे सार्वजनिक इलाकों में भी इस्तेमाल करने की योजना थी। रोबोट में ३६० डिग्री वैâमरे, टू-वे इमरजेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम और एक इमरजेंसी कॉल बटन दिया गया था, जिससे लोग जरूरत पड़ने पर पुलिस से संपर्क कर सकते थे। डबलिन पुलिस का मानना था कि यह रोबोट भीड़भाड़ वाले इलाकों में निगरानी रखने, सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ाने और पुलिस की मदद करने का काम करेगा। शहर ने इसे दो साल के पायलट प्रोग्राम के तहत इस्तेमाल करना शुरू किया था। हालांकि, एक साल के भीतर ही अधिकारियों को लगने लगा कि रोबोट उनकी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है। डबलिन पुलिस की प्रवक्ता रॉबिन ग्रे के मुताबिक, शहर ने समीक्षा के बाद पैâसला लिया कि यह सिस्टम वैसा रिजल्ट नहीं दे रहा था जैसी उम्मीद थी। इसी वजह से मई २०२६ में डबबॉट को सेवा से हटा दिया गया और वापस उसकी कंपनी नाइटस्कोप को भेज दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, शहर ने शुरुआत में दो रोबोट तैनात करने की योजना बनाई थी।
भविष्य देखना था
इतना पैसा खर्च होने के बावजूद डबबॉट के खाते में कोई बड़ी उपलब्धि दर्ज नहीं हुई। हालांकि, शहर प्रशासन का कहना है कि इस पायलट प्रोग्राम का मकसद सिर्फ गिरफ्तारी या चालान की संख्या बढ़ाना नहीं था। असली मकसद यह देखना था कि वास्तविक परिस्थितियों में ऐसा रोबोट पुलिस की कितनी मदद कर सकता है और भविष्य में इस तरह की तकनीक को अपनाना कितना प्रैक्टिकल होगा।
