-बीएचयू में चिकन करी में मिली मरी छिपकली, मची सनसनी
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को देश-दुनिया में ‘स्मार्ट सिटी’ और ‘बेहतर क्वालिटी ऑफ लाइफ’ का मॉडल बताकर प्रचारित किया जाता है। लेकिन इसी वाराणसी के सबसे बड़े केंद्रीय विश्वविद्यालय में छात्रों को कथित तौर पर जहरीला और घटिया खाना खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। सवाल यह है कि आखिर करोड़ों के विकास दावों के बीच छात्रों की थाली तक सुरक्षित क्यों नहीं है?
दरअसल, वाराणसी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के डालमिया हॉस्टल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मेस में परोसी गई चिकन करी में चिकन पीस की जगह मरी हुई छिपकली दिखाई पड़ी। इस घटना के सामने आते ही हॉस्टल में हड़कंप मच गया और खाना खा रहे छात्र असहज हो गए। कई छात्रों ने उल्टी और मितली की शिकायत भी की। देखते ही देखते बड़ी संख्या में छात्र मेस के बाहर इकट्ठा हो गए और खाने की गुणवत्ता को लेकर विरोध शुरू कर दिया। छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल और मेस में परोसे जा रहे खाने की गुणवत्ता बेहद खराब है। कई छात्रों की तबीयत बिगड़ने की शिकायतें सामने आई हैं। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ जांच और आश्वासन की बातें कर रहे हैं। अगर देश के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ होगा, तो फिर ‘न्यू इंडिया’ के दावे कितने खोखले है, यह इस घटना से पता चलता है। भाजपा सरकार लगातार विकास और विश्वस्तरीय सुविधाओं का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। शिक्षा व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं तक, हर स्तर पर सिस्टम फेल नजर आ रहा है और इसकी कीमत आम जनता और छात्र चुका रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है स्वास्थ्य की गारंटी देनेवाली भाजपा राज में छात्रों को यह बदहाल व्यवस्था क्यों झेलनी पड़ रही है?
