– यूपी पुलिस ने रसायन विज्ञान को भी कर दिया फेल
– कोर्ट बोला, तुम्हारी नीयत में है खोट
बॉलीवुड के मशहूर विलेन अजीत जब भी अपनी सेक्रेटरी को बुलाते थे, उनका एक डायलॉग खूब गूंजता था, `मोना डार्लिंग!’ लेकिन इस बार कहानी फिल्मी नहीं, बल्कि ऐसी है कि हर कोई हैरान रह जाते। गजब हो गया, डार्लिंग मोना! यूपी पुलिस की कहानी में १ करोड़ रुपए का सोना पानी में ऐसा गल गया कि उसकी कीमत महज कागजों में सिमटकर रह गई। पुलिस की दलील सुनकर रसायन विज्ञान के नियम भी सवाल पूछने लगें। आखिर ऐसा कौन सा पानी था, जिसमें सोना ही घुल गया? मामला कोर्ट पहुंचा तो पुलिस की पूरी थ्योरी कटघरे में खड़ी हो गई। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कहानी से ज्यादा खोट नीयत में नजर आ रहा है। अब सवाल यह है कि करोड़ों के सोने को गायब करने की इस कहानी के पीछे आखिर सच क्या है?
बता दें कि यूपी के लखीमपुर खीरी में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब १७ साल पुराने एक दहेज हत्या केस में अदालत ने पुलिस की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जब्त किए गए सोने के जेवर बारिश में खराब हो गए और बाकी जेवर बंदर उठा ले गए। मामला वर्ष २००७ का है, जब कपूरथला मोहल्ले निवासी मुदित अग्रवाल की पत्नी रानी अग्रवाल उर्फ जूली ने दीपावली की रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पोस्टमार्टम के दौरान महिला के शरीर से सोने की चेन, लॉकेट, अंगूठी, चूड़ियां और अन्य जेवर उतारकर पुलिस को सौंपे गए थे। इसके बाद मायके पक्ष की शिकायत पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ और ससुराल पक्ष को जेल भी जाना पड़ा। हालांकि, लंबी सुनवाई के बाद २८ फरवरी २०२४ को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इसके बाद मुदित अग्रवाल ने अदालत से जब्त जेवर वापस दिलाने की मांग की। इस पर पुलिस ने रिपोर्ट दाखिल कर दावा किया कि मालखाने में रखी जेवरों की पोटलियां भीग गई थीं, जिन्हें सुखाने के लिए छत पर रखा गया था। बारिश से अधिकांश जेवर खराब हो गए और जो बचे थे उन्हें बंदर उठा ले गए। अदालत ने इस स्पष्टीकरण पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि सोने के जेवर बारिश में नष्ट नहीं हो सकते।
अदालत ने पुलिस पर जताया गबन का शक
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि संबंधित पुलिसकर्मियों ने बहुमूल्य जेवरों का दुरुपयोग किया और बाद में रिकॉर्ड में फर्जी प्रविष्टियां कीं। अदालत ने मामले की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई तथा पीड़ित पक्ष को उचित क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए हैं। बावजूद इसके, पीड़ित परिवार को अब तक राहत नहीं मिल सकी है।
