मुख्यपृष्ठनए समाचाररूपाली चाकणकर को एक और झटका ...भाई संतोष बोराटे सरपंच चुनाव हारे

रूपाली चाकणकर को एक और झटका …भाई संतोष बोराटे सरपंच चुनाव हारे

 

सुनील ओसवाल / मुंबई
‘भोंदू बाबा’ उर्फ वैâप्टन खरात प्रकरण से घिरी राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) की नेता रूपाली चाकणकर के लिए राजनीतिक मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। हालिया घटनाक्रम में उनके सगे भाई संतोष बोराटे को दौंड तालुका के नांदूर ग्राम पंचायत सरपंच पद के उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा है, जिसे चाकणकर के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है। चाकणकर का नाम विवाद में आने के बाद उन्हें राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने पार्टी के महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से भी किनारा कर लिया। इन घटनाओं के बाद अब उनके करीबी पारिवारिक सदस्य की चुनावी हार ने राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है। करीब डेढ़ महीने तक सार्वजनिक गतिविधियों से दूर रहने के बाद चाकणकर ने नाशिक जिले के नांदूर में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर सक्रियता के संकेत दिए थे। सोशल मीडिया पर साझा की गई इस बैठक की तस्वीरों को उन्होंने ‘गोतावल’ शीर्षक दिया, लेकिन बैठक की विषयवस्तु सार्वजनिक नहीं की गई।
इसी दौरान घोषित ग्राम पंचायत उपचुनाव परिणामों में नांदूर सरपंच पद के लिए हुए मुकाबले में विशाल नरेंद्र थोरात ने ३०४ मतों से जीत हासिल की। इस जीत को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। बोराटे की हार के पीछे स्थानीय असंतोष, कार्यशैली को लेकर मतदाताओं में नाराजगी और संगठनात्मक कमजोरी जैसे कारणों की चर्चा है। राजनीतिक जानकार इसे संकेत मान रहे हैं कि हालिया विवादों का असर जमीनी स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। चाकणकर के लिए यह समय राजनीतिक पुनर्संतुलन का माना जा रहा है, जहां उन्हें न केवल अपनी छवि सुधारने, बल्कि संगठन में भरोसा फिर से कायम करने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

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