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मक्खीमार अस्पतालों का गोरखधंधा … यहां मरीज, जांच और इलाज सब फर्जी! …इंश्योरेंस के नाम पर होती है लाखों की ठगी

फिरोज खान / मुंबई
मीरा रोड, भायंदर, वसई और नालासोपारा के कई मक्खीमार अस्पतालों में एक जबरदस्त गोरखधंधा चल रहा है। इन अस्पतालों में फर्जी मरीजों का फर्जी इलाज होता है और उसके बाद इंश्योरेंस के लाखों रुपए का वारा-न्यारा होता है।
इस धंधे से इंश्योरेंस कंपनियों को करोड़ों रुपए का चूना लग रहा है। यह स्वैâम बहुत बड़ा है। असल में इन इलाकों के कई अस्पताल मरीजों के बिना खुद बीमार पड़े हैं और मक्खियां मार रहे हैं। ऐसे अस्पतालों के मालिकों को अस्पताल का खर्चा, स्टाफ की तनख्वाह निकालना भी मुश्किल हो रहा है, इसी वजह से इन अस्पतालों ने कमाने के लिए नया धंधा शुरू कर दिया है। मरीज फर्जी, इलाज फर्जी लेकिन इनका बिल असली होता है। इस पूरे गोरखधंधे का खेल कुछ इस तरह है। इन इलाकों में बहुत से ऐसे अस्पताल हैं, जिनका खर्चा निकलना मुहाल है, ऐसे में इन अस्पताल के मालिक गरीबों का इंश्योरेंस करवाते हैं।

पुलिस ने लिया एक्शन
इस प्रâॉड का खुलासा तब हुआ, जब नालासोपारा पुलिस ने सोमवार को एक डॉक्टर और हॉस्पिटल के स्टाफ के सदस्यों पर इंश्योरेंस कंपनियों से गैर-कानूनी तरीके से फाइनेंशियल फायदे लेने के लिए इंश्योरेंस डॉक्यूमेंट्स में जालसाजी करने के आरोप में पकड़ा।

मालिक भरता है प्रीमियम
ये लोग गरीब, मजदूर, और अपने खास जान पहचान वालों का इंश्योरेंस करवाते हैं। इंश्योरेंस के प्रीमियम का पैसा अस्पताल का मालिक ही भरता है। फिर शुरू होता है असली खेल।

लैब वाले बनाते हैं फेक रिपोर्ट
इन फर्जी मरीजों को बीमार बताकर अस्पताल में भर्ती करवाया और लंबा-चौड़ा बिल बनाकर इंश्योरेंस कंपनी से पैसा वसूला जाता है। इस फर्जीवाड़े में लैब वाले भी मिले होते हैं, जो फेक रिपोर्ट बनाकर अस्पताल को मुहैया करवाते हैं।
इंश्योरेंस की आड़ में स्कैम!
नालासोपारा में पुलिस ने एक अस्पताल के एक डॉक्टर और स्टाफ मेंबर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच अधिकारियों के मुताबिक, अस्पताल वाले इंश्योरेंस की आड़ में बहुत बड़ा स्वैâम कर रहे हैं। जब मरीज इलाज के लिए भर्ती होते हैं तो अस्पताल द्वारा इंश्योरेंस कंपनियों को असली मेडिकल डॉक्यूमेंट जमा करने होते हैं, ताकि खर्च वापस किया जा सके। लेकिन इस मामले में इंश्योरेंस कंपनियों से लाखों रुपए निकालने के लिए मरीजों के नकली रिकॉर्ड और नकली कागजात का इस्तेमाल किया गया। यह रैकेट एक टिप-ऑफ के बाद सामने आया, जिसके बाद वसई-विरार सिटी के हेल्थ डिपार्टमेंट ने नालासोपारा (ईस्ट) के एक अपार्टमेंट में रेड मारी।
ऑपरेशन के दौरान अधिकारियों को बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामान मिला, जिसमें ७० से ८० अस्पतालों के नकली लेटरहेड, नकली इन-पेशेंट डिपार्टमेंट रिकॉर्ड और खासतौर पर इंश्योरेंस क्लेम के लिए बनाई गई नकली केस फाइलें शामिल थीं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कुछ अन्य मामलों में आरोपियों ने मरीजों की डिटेल्स हासिल कीं और उनका इस्तेमाल झूठे इंश्योरेंस क्लेम फाइल करने के लिए किया, जिससे कंपनियों को बड़ी रकम का चूना लगा। अधिकारी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि धोखाधड़ी कितनी बड़ी थी और क्या इस साजिश में और लोग या संस्थाएं शामिल हैं?
फर्जी दस्तावेजों की जांच
नालासोपारा पुलिस स्टेशन के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि फ्लैट से मिले डॉक्यूमेंट्स की जांच कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आरोपियों ने मरीजों के कितने नकली इंश्योरेंस डॉक्यूमेंट्स बनाए थे। इसके अलावा डॉक्यूमेंट्स को वेरिफाई कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आरोपियों ने कितने मरीजों के नकली इंश्योरेंस डॉक्यूमेंट्स बनाए थे।

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