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आम नागरिकों की जेब पर फिर डाका

 -फास्ट टैग के नए लोकल पास से मुंबईकरों को ठगने की तैयारी?
-अटल सेतु और वर्ली सी लिंक पर मनमानी वसूली जारी

द्रुप्ति झा / मुंबई

महंगे टोल और ट्रैफिक से जूझ रही मुंबई की जनता के लिए फास्ट टैग का नया लोकल पास राहत कम और एक नया धोखा ज्यादा साबित हो रहा है। सालाना फास्ट टैग लोकल पास के नाम पर टोल खर्च में राहत की उम्मीद लगाए बैठे शहर के वाहन चालकों के हाथ एक बार फिर सिर्फ मायूसी और जेब खाली होने का जरिया ही लगा है।
दावा किया जा रहा था कि इस नए नियम से लोगों के पैसे बचेंगे, लेकिन हकीकत यह है कि मुंबई की लाइफलाइन माने जाने वाले बांद्रा-वर्ली सी लिंक और अटल सेतु जैसे प्रमुख मार्गों पर यात्रा करने वालों को इस कथित छूट का फूटी कौड़ी का फायदा नहीं मिलेगा।
सालाना `३,००० का पास, पर काम का नहीं
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, २००८ में संशोधन कर इस पास का एलान तो कर दिया, लेकिन शर्तों का ऐसा जाल बुना है कि आम आदमी के लिए यह पास बेकार साबित हो। १ नवंबर, २०२६ से इस पास की कीमत सीधे बढ़ाकर ३,००० रुपए कर दी जाएगी, लेकिन इतनी मोटी रकम वसूलने के बावजूद यह पास पूरे शहर के लिए नहीं है। नियमों के मुताबिक, यह पास सिर्फ उसी एक चुनिंदा टोल प्लाजा पर चलेगा, जिसके लिए इसे जारी किया गया है। यानी रोजाना कई टोल पार करने वाले कामकाजी और मध्यमवर्गीय चालकों के लिए यह पास पूरी तरह बेमतलब है।
मुंबई और नई मुंबई के बीच सफर करने वाले यात्रियों को अटल सेतु पर और दक्षिण मुंबई जाने वालों को बांद्रा-वर्ली सी लिंक पर भारी-भरकम टोल चुकाना ही पड़ेगा। प्रोजेक्ट प्रâेमवर्क और अलग टोल व्यवस्था का बहाना बनाकर सरकार ने इन मुख्य पुलों को पास के दायरे से बाहर रखा है। साफ है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इन अति-व्यस्त रूटों पर आम जनता से मोटा टोल वसूलने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहतीं।

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