मुख्यपृष्ठग्लैमरअनुराग कश्यप–मनोज बाजपेयी: गुस्से से गहराई तक की दोस्ती

अनुराग कश्यप–मनोज बाजपेयी: गुस्से से गहराई तक की दोस्ती

हिमांशु राज

अनुराग कश्यप और मनोज बाजपेयी की दोस्ती 1998 की फिल्म ‘सत्या’ से शुरू हुई थी। इस फिल्म में अनुराग कश्यप ने स्क्रीनप्ले लिखा था और वहीं से दोनों का जुड़ाव हुआ। इसके बाद उन्होंने राम गोपाल वर्मा की फिल्मों ‘शूल’ और ‘कौन’ में भी साथ काम किया। सालों बाद, अनुराग ने मनोज को अपनी 2012 की हिट फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में लीड भूमिका दी, जिसने दोनों के करियर को नई पहचान दी।

मनोज बाजपेयी का मानना है कि उनके और अनुराग के बीच सबसे बड़ी कड़ी गुस्सा है। एक्टर कहते हैं कि अनुराग अपनी दृढ़ता के लिए जाने जाते हैं, जिनके चलते उन्होंने कई दुश्मन बनाए, गुस्से में चोटें लीं, लेकिन कभी अपनी बात से पीछे नहीं हटे। मनोज बताते हैं कि वे खुद अनुराग जितने गुस्सैल हैं, लेकिन उनसे अधिक व्यावहारिक भी हैं। उन्होंने कहा कि अनुराग कभी-कभी अपना संतुलन खो देते हैं, लेकिन वे फिर अपने आप को संभाल लेते हैं।

ट्रोल्स के प्रति मनोज का नजरिया काफी साफ है। उनका कहना है कि ट्रोल्स को नजरअंदाज करना सबसे सही तरीका है, क्योंकि वे सिर्फ नुकसान पहुंचाते हैं और उनके पास सम्मान के लायक कुछ भी नहीं होता। मनोज ने कहा कि अगर हर कोई काम पर फोकस करे और ट्रोल्स की ओर ध्यान न दे, तो सिर्फ मेहनत करने वालों को ही सम्मान मिलेगा। उन्होंने अनुराग की यात्रा की भी सराहना की और माना कि उन्होंने इस सफर में बहुत बलिदान दिए हैं।

पिछले साल दोनों के बीच कुछ अनबन हुई थी, जिसे मनोज ने खुद स्वीकार किया था। लेकिन अब उनकी दोस्ती फिर से मजबूत हो चुकी है। अनुराग कश्यप की नई फिल्म ‘निशानची’ 19 सितंबर को रिलीज होने जा रही है, जो एक्शन-कॉमेडी है। इसके अलावा उनकी फिल्म ‘बंदर’ का प्रीमियर हाल ही में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जिसमें बॉबी देओल अहम भूमिका में हैं।

इस दोस्ती की खासियत है गुस्से के बीच व्यावहारिकता और समझदारी का मेल, जो दोनों को एक-दूसरे से जोड़ती है और वर्षों से उनके रिश्ते को मजबूत बनाए रखती है। उनकी फिल्मों और पर्सनल रिश्तों की यह कहानी कई कलाकारों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

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