मुख्यपृष्ठनए समाचारकिसके इशारे पर मिला गुंडे को गन का लाइसेंस?

किसके इशारे पर मिला गुंडे को गन का लाइसेंस?

-गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने झाड़ा पल्ला

-बोले, ‘वरिष्ठ के कहने पर किया हस्ताक्षर’

सामना संवाददाता / मुंबई

कुख्यात गुंडे निलेश घायवल के भाई सचिन घायवल को गन लाइसेंस देने के मामले में गृह राज्यमंत्री योगेश कदम फंस गए हैं। चारों तरफ से घिर चुके योगेश कदम ने इस मामले में अब वरिष्ठ नेताओं को घसीट लिया है। अपना पल्ला झाड़ते हुए योगेश ने कहा कि इस मामले में सभी बातें उन्होंने सीएम फडणवीस को बता दी हैं। ऐसे में अब सवाल उठने लगा है कि क्या इस मामले में सीएम और गृह मंत्री फडणवीस को इसकी जानकारी थी? इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर वह कौन वरिष्ठ नेता है, जिसके इशारे पर यह गन लाइसेंस सचिन घायवल को दिया गया? चूंकि फडणवीस के पास गृह मंत्रालय है इसलिए अब इस मामले में फडणवीस पर भी दाग लगता नजर आ रहा है। हालांकि, सूत्रों की मानें तो फिलहाल इस मामले में राज्य विधान परिषद के एक वरिष्ठ नेता का नाम भी आगे आ रहा है।
गन लाइसेंस देने के मामले में गृह राज्यमंत्री योगेश कदम के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। विपक्ष ने महायुति सरकार को गुंडों को शह देने वाली सरकार बताते हुए सीएम फडणवीस को भी घेरे में लिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस आग में सीएम फडणवीस भी झुलसेंगे क्योंकि उनकी शह पर ही योगेश कदम ने खुलकर गन लाइसेंस बांटे हैं। अब इस मामले की गंभीरता और खुद पर आती मुसीबत को देखते हुए कदम ने इस मुद्दे पर अपना पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि घायवल को गन का लाइसेंस राज्य के मंत्रिमंडल में शामिल एक बड़े नेता के आदेश पर दिया गया। ऐसा कहकर बड़ी चालाकी से उन्होंने इस मामले में राज्य के एक वरिष्ठ सत्ताधारी नेता के पाले में गेंद फेंक दी है। योगेश कदम के इशारे के बाद साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस मामले में कई बड़े नाम शामिल हैं।
‘मैंने सिफारिश नहीं की’
योगेश कदम ने कहा कि जो लोग मुझ पर आरोप लगा रहे हैं, उन्हें शायद यह जानकारी नहीं है कि हथियार का लाइसेंस संबंधित पुलिस आयुक्त की स्वीकृति और हस्ताक्षर से जारी किया जाता है। इस मामले में मैं पत्रकार परिषद लेकर विस्तृत जानकारी दूंगा। गृह राज्यमंत्री ने आगे कहा कि विपक्ष की आलोचना पर मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि जब से मैं गृह राज्यमंत्री के पद पर बैठा हूं, तब से अब तक मैंने किसी भी व्यक्ति के लिए सिफारिश नहीं की है। अपराधी प्रवृत्ति को बढ़ावा देने का काम मैंने आज तक कभी नहीं किया और आगे भी नहीं करूंगा।

गैंगस्टरों को गन देने वाले गृह राज्यमंत्री की करो छुट्टी!

-अनिल परब की मांग

गुंडे निलेश घायवल के भाई सचिन घायवल को हथियार का लाइसेंस दिए जाने के मुद्दे पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता अनिल परब ने राज्य की महायुति सरकार को जमकर घेरा है। उन्होंने इस मामले में सीएम फडणवीस को भी निशाना बनाया है। अनिल परब ने गृह राज्यमंत्री योगेश कदम के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि योगेश कदम की मंत्रिमंडल से तुरंत छुट्टी की जानी चाहिए।
परब ने कहा कि पुणे पुलिस आयुक्त ने सभी जांच-पड़ताल के बाद घायवल के गन लाइसेंस के आवेदन को खारिज कर दिया था, लेकिन गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने सिफारिश पत्र देकर पुलिस आयुक्त से लाइसेंस देने को कहा। इस मामले में रामदास कदम और योगेश कदम दोनों ने सामने आकर अपनी बात रखी। रामदास कदम ने कहा कि घायवल पर कोई केस नहीं था। गृह राज्यमंत्री योगेश कदम के पिता और शिंदे गुट के नेता रामदास कदम ने पुणे में घायवल प्रकरण पर कहा कि अनिल परब हमेशा योगेश कदम को निशाना बनाते हैं। रामदास कदम ने कहा कि जब मैंने योगेश कदम से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि विधानसभा में एक बड़े पद पर बैठे, मंत्रियों को भी आदेश देने वाले व्यक्ति ने उन्हें ऐसा करने को कहा था। उस व्यक्ति के कहने पर योगेश कदम ने यह निर्णय लिया।
-गुंडे को फरार करवाने में तीन सत्ताधारी विधायकों का हाथ?

-भाजपा, शिंदे और दादा गुट तीनों की मिलीभगत का आरोप
कुख्यात गैंगस्टर निलेश घायवल पुलिस की नजर से बचकर लंदन भाग गया। अब सवाल उठ रहा है कि जब उस पर कई गंभीर मामले दर्ज हैं तो उसे पासपोर्ट वैâसे मिला? इस सवाल का जवाब अब तक सामने नहीं आया है। हालांकि, आरोप है कि निलेश घायवल को भगाने में महायुति के तीनों दलों के नेताओं का हाथ है। राकांपा नेता रोहित पवार के अनुसार, पुणे में निलेश घायवल का संबंध केवल एक ही नेता से नहीं, बल्कि सत्ताधारी तीन नेताओं से रहा है। अब इस मामले में भाजपा के एक वरिष्ठ मंत्री का भी नाम जुड़ रहा है। रोहित पवार ने कहा कि भाजपा नेता और वर्तमान विधान परिषद सभापति राम शिंदे की प्रचार सभा का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें निलेश घायवल, राम शिंदे के पैर छूते हुए नजर आ रहा है। इतना ही नहीं, विधानसभा चुनाव के दौरान भी निलेश घायवल, राम शिंदे के प्रचार में भाषण देते हुए दिखाई दिया था। रोहित पवार के अनुसार, शिंदे गुट के एक नेता और अजीत पवार गुट के एक नेता का भी उसके साथ करीबी संबंध है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि इन नेताओं में ही किसी ने उसके विदेश भागने में मदद की होगी।

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