मुख्यपृष्ठस्तंभअवधी व्यंग्य : जीजा के मिठाई

अवधी व्यंग्य : जीजा के मिठाई

एड. राजीव मिश्र मुंबई
आज सबेरन सबेरे बहोरन के जीजा स्वारथ घरे आइ धमके। बहोरन के जीजा फटफटिया से उतरे अउर धोती-कुर्ता संभारत बइठका की ओर चले। जीजाजी बइठका में पहुँचि नही पाए तब तक बहोरन दौड़ के जीजा के गोड़ लागि गएँ। पालागी जीजा… खुश रहो जीयत रहो… पूरे गाँव में राज करा। का राज करी जीजा, घर मा राज होइ नही पावत है अउर तू पूरे गाँव पर राज करावत हयऽ। काहें घर मे का होइ गवा सरहज पियार नही करत का? नही-नही उ बात नही है, बहोरन दाँत चियारत बोले। तो फिर का बात है? चलो जवन भी बात होय शांति से बताओ, पहिले ई मिठाई घर मा लेइ जाओ। बहोरन मिठाई के झोरा लइके घर मा चले गए अउर थोड़ी देर के बाद कटोरी मा दुइ ढोका गुड़ लइके परकट भये। लो जीजा पानी पियो। स्वारथ दुरियय से भाँपि गए कि कटोरा में गुड़ आवा है। गुड़ देखतै स्वारथ के दिमाग के पारा गरम होइ गवा। ई का है बहोरन? गुड़ है जीजा पानी पियो! हम एक किलो बेनी के इमिरिती लेइके आये अउर तुम हमरा ई करियवा गुड़ से पानी पियावत अहा। तुम लोगन के इहै आदत ठीक नही है। अब आपन समिस्या बताओ। अरे छोड़व जीजा, नही नही काहें छोड़व… आखिर तू हमरा इकलौता सार अहा, तुम्हार समिस्या हमार समिस्या… हम तू बाटा थोरिउ न हैं। हाँ जीजा, अब का बताई, आप तो जनतय हयऽ कि हमरे बियाह के पाँच बरिस हुइ गवा, पर अबहीं तक बहुरिया के गोद हरी नही भई। हाँ उ तो ठीक है, पर तुमका तो बशारतपुर वाले ओझा के नंबर तो दिया रहा। अरे का बताई जीजा, एक दिन गए तो एक ठो टोटका बताएं… दूसरे दिन गए तो दूसर टोटका बताए… तीसरे दिन गए तो पता चला उ बंगाली बाबा के दवाखाना में गए हैं। तो का होइ गवा? अदमी फोड़ा-फुंसी के इलाज करावे जइबे करी। जीजा उ बात नही है जवन तुम समझत हौ, बात ई है कि उनके मेहरिया के भी गोद बंजर है। तो उ बंगाली बाबा के इहाँ इलाज करावे गय रहें। तब से हम उनके इहाँ नही गए। ठीक है जेहिया से तू लाइ मिठाई से जीजा के पानी पियावय सीखि जइबा उही दिन उ ओझा ओझाई सीखि जाई, इतना बोलि के बिना पानी पिये स्वारथ फटफटिया के किक मारि दिहेन।

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