एड. राजीव मिश्र, मुंबई
अरे छोड़व ! तुम्हरे जइसन चौधरी केतने आये अउर केतने गए। अबहीं हमका जानत नही हौ, अगर हम अपने पर आइ गए तो तुम्हरा सारा चौधिरियाना एक झटके में बहिरियाय जाई। इतना कहिके भगेलू गांव के सबसे ताकतवर मनई मतलब गांव के चौधरी के खिलाफ ताल ठोंकी दिहिन। पलटू चौधरी, जेहिके पास पिछले बीस बरिस से गांव के परधानी है, साम-दाम-दण्ड-भेद जेहिके दासी हैं, जे आज तक गांव में अगलगउअल के भरोसे पुलिस थाने के दलाल हुए रहें, आज उनके सियासत के शुतुरमुर्ग उड़ा चाहत है। अब इतने दिन के भौकाल इतनी आसानी से तो जाए नही पाई, सो होत सबेर अपने दूनउ लड़िका के साथ लट्ठ लइके भगेलू के घर पे धावा बोलि दीहें। चौधरी के आदत से परिचित उंहा भगेलू भी लाठी में तेल लगाए बइठे रहे फिर का चलइ लागि दूनउ ओर से लट्ठ। दस मिनट बाद भगेलुआ अकेलय चौधरी अउर उनके दूनउ लड़िका के खुनवाखुनन्त कइ दिहिस। ताव में चौधरी अपने खेत से जाय के भगेलू के ट्रैक्टर रोकि दिहेन। जबाब में भगेलू अपने दुआर से चौधरी सहित पूरे गांव के रस्ता रोकि दीहें। अब का दूनउ ओर से पुलिस थान-कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगय लागि। भगेलू के पास ओहिके जिद के साथ-साथ रोरियहवा बांस के तेल लगी लाठी रही तो उ हार मानय के तैयार नही। अब चौधरी के साथ-साथ पूरे गांव के रस्ता बंद होइ गवा तो पूरे गांव के दबाव धीरे-धीरे चौधरी पर बढ़य लागि। चौधरी के रुपिया-पइसा के साथ दिन-ब-दिन ताकत के भौकाल भी धीरे-धीरे गांव वालन के बीच से कम होइ रहा है। चौधरी ई समस्या लइके अपने गुरु के पास पहुंचे, उनकर गुरु सोच-विचार के कहिन, अइसा है चौधरी! गांव के कउनउ मनई के तैयार करो जे तुम्हरे अउर भगेलुआ के बीच शांति-वार्ता कराय सके। अइसन मनई तो कउनउ नही है गुरुजी, काहें कि गांव के सब लोग चाहत हैं कि हमरे इज्जत के इटावा होइ जाय। बस एक अदमी है पर उ बिरादरी के बाहेर है। तो का भवा ? कल के कल ओहिके गोड़ पे गिरि जाओ अउर जल्दी से युद्धविराम कराय लेव नही तो न तुम रहिहौ न तो तुम्हरा चौधिरियाना रही। फिर का दूसरे दिन गांव के सबसे नल्ला मनई चौधरी से दुइ हजार रुपिया लइके चौधरी अउर भगेलू में युद्धविराम कराय दिहिस।
