सामना संवाददाता / मुंबई
एसआईआर को लेकर जारी विवाद के बीच एक हाई-प्रोफाइल मामला सामने आया है। इंडसइंड बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजीव आनंद ने कहा है कि मतदाता सूची में उनका नाम ‘अनमैप्ड’ दिखाया गया और उन्हें सुनवाई के लिए उपस्थित होने को कहा गया, अन्यथा नाम हटाए जाने का खतरा बताया गया।
आनंद ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे पात्र होने के बाद से हर चुनाव में मतदान करते रहे हैं और उनके पास आधार, पैन, पासपोर्ट और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इसके बावजूद व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत क्यों पड़ी।
हालांकि चुनाव आयोग ने बाद में प्रक्रिया आसान करने के निर्देश जारी किए। आयोग के मुताबिक ‘अनमैप्ड’ या तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं के घर जाकर बूथ स्तर अधिकारी दस्तावेज ले सकते हैं। सामान्य तौर पर उन्हें निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय बुलाना जरूरी नहीं होगा; अपवाद की स्थिति में ऑनलाइन सुनवाई भी संभव है। यह एक व्यक्तिगत दर्ज मामला है, लेकिन एसआईआर की मैपिंग प्रक्रिया को लेकर व्यावहारिक सवाल जरूर खड़ा करता है। पुराने और नियमित मतदाता ‘अनमैप्ड’ वैâसे हो रहे हैं?
