मुख्यपृष्ठनए समाचार‘ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी की, अब इस्तीफा नहीं गिरफ्तारी होनी चाहिए’

‘ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी की, अब इस्तीफा नहीं गिरफ्तारी होनी चाहिए’

-कांग्रेस का जोरदार हमला
-मतदाता सूची से कथित छेड़छाड़ को देश के लोकतंत्र और संविधान की आत्मा पर घात बताया
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस का विरोध तेज हो गया है। २८ सितंबर को महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस ने प्रदर्शन कर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सोलापुर में सांसद प्रणिति शिंदे ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के लिए केवल राजनीतिक जवाबदेही तय करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसकी जांच और आपराधिक कार्रवाई भी होनी चाहिए। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग की।
प्रणिति शिंदे ने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर ‘वोट चोरी’ की गई है। उनके मुताबिक, किसी नागरिक को देश का मतदाता मानना है या नहीं, यह तय करने की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में जरूर है, लेकिन इस प्रक्रिया में मनमानी या राजनीतिक हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वोट चोरी केवल किसी एक चुनाव को प्रभावित करने का मामला नहीं है, बल्कि इससे लोकतंत्र की बुनियाद प्रभावित होती है। यदि विपक्षी विचार रखने वाले नागरिकों के नाम ही मतदाता सूची से बाहर हो जाएं, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का संतुलन बिगड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र संविधान और मताधिकार पर टिका है और मतदाता सूची में कथित हेरफेर को इसी नजरिये से देखा जाना चाहिए। कांग्रेस ज्ञानेश कुमार पर लगातार हमलावर है।
पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग के भीतर उठी आपत्तियों ने मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। २३ सितंबर को सामने आई एक रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा कुछ फैसलों और आदेशों पर कम-से-कम १४ बार आपत्ति जताए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन दावों के जवाब में कहा है कि एसआईआर सहित उसके हाल के निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी विपक्ष के ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों को निराधार बताया है। इस बीच, कांग्रेस ने राज्यभर में जिला कलेक्ट्रेट कार्यालयों के सामने प्रदर्शन कर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग दोहराई।
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‘मताधिकार छीनना यानी देश का डीएनए बदलना’
प्रणिति शिंदे ने कहा कि वोट चोरी का अर्थ केवल वोट की चोरी नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक चरित्र को बदलने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि संविधान, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले मतदाताओं को ही व्यवस्था से बाहर कर दिया गया तो देश की राजनीतिक दिशा प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान लोकतंत्र और संविधान से है। इसलिए मतदाता सूची में किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

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