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अब अदालत में चुनाव आयोग के ‘१४ आदेश’!..महाराष्ट्र एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिका में कथित एकतरफा

-प्रशासनिक फैसलों को रिकॉर्ड पर रखने, हटाए गए मतदाताओं की बहाली और
-स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग; कोल्हापुर पीठ २२ अक्टूबर को करेगी सुनवाई
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठा विवाद अब मुंबई हाई कोर्ट पहुंच गया है। कोल्हापुर सर्किट बेंच ने चार मतदाताओं की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए मामले को २२ अक्टूबर के लिए रखा है। याचिका में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े कथित १४ ‘एकतरफा प्रशासनिक आदेशों’ और बदलावों को रिकॉर्ड पर रखने तथा उन्हें रद्द करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने महाराष्ट्र में एसआईआर के दौरान हटाए गए सभी मतदाताओं के नाम बहाल करने और राज्य में एसआईआर संबंधी निर्देशों को रद्द करने की मांग की है। इसके अलावा कथित डेटा डिलीशन और सॉफ्टवेयर ब्लॉकेज की जांच के लिए सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक समिति गठित करने की मांग भी की गई है। ये याचिका में लगाए गए आरोप और मांगी गई राहतें हैं, अदालत के निष्कर्ष नहीं।
१४ फैसलों पर उठे सवाल
याचिका की पृष्ठभूमि इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट से जुड़ी है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के कुछ पैâसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम १४ मौकों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, मतदाता सूची के आंकड़ों, चुनावी पंजीकरण अधिकारियों की भूमिका तथा सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन पैâसलों में बहुसदस्यीय चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं हुआ।
हालांकि, चुनाव आयोग का कहना रहा है कि आंतरिक मतभेद या विचार-विमर्श को अंतिम पैâसले से अलग देखा जाना चाहिए और एसआईआर से जुड़े पैâसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
५ अक्टूबर को दूसरी याचिका
इस मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका मुंबई में मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी की पीठ के समक्ष ५ अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। इसमें एसआईआर के दौरान दस्तावेज जुटाने और ‘उपलब्ध नहीं’ श्रेणी के आधार पर मतदाताओं को बाहर किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
अब अदालत के सामने मूल सवाल यह है कि एसआईआर से जुड़े प्रशासनिक पैâसलों की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी और मतदाता सूची में बदलाव करते समय कानूनी सुरक्षा उपायों का कितना पालन हुआ। आने वाली सुनवाई में इन सवालों पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा।

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