-विकास योजनाओं का दिखाया लॉलीपॉप
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
दिवालिया हो चुकी महायुति सरकार ने एक बार फिर अपनी नाकामी छुपाने के लिए हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के सामने हाथ फैलाए हैं। इस सरकार ने मीरा-भायंदर, नागपुर और छत्रपति संभाजी नगर में विकास योजनाओं का लॉलीपॉप दिखाकर सरकार ने हुडको से २,००० करोड़ रुपए का कर्ज लेने का फैसला किया है। इन शहरों के नाम पर दिखाए जा रहे प्रोजेक्ट दरअसल, जनता को गुमराह करने का चुनावी स्टंट हैं। हालांकि, हकीकत यह है कि यह रकम जनता की बुनियादी सुविधाओं पर खर्च होने के बजाय खर्चा-पानी और सत्ता के चहेतों की जेब भरने में उड़ जाएगी। पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे महाराष्ट्र पर यह कदम आनेवाली पीढ़ियों के लिए और भी घातक साबित होगा।
उल्लेखनीय है कि महायुति सरकार के शासन में महाराष्ट्र पहले से ही करीब साढ़े आठ लाख करोड़ कर्ज ढो रही है। इसी में महायुति सरकार ने जनता पर कर्ज का नया बोझ लाद दिया है। मंत्रिमंडल की बैठक में हुडको से २००० करोड़ रुपए का भारी-भरकम कर्ज लेने को मंजूरी दी गई। दावा किया जा रहा है कि इस रकम से मीरा-भायंदर, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर सहित कई शहरों के अधूरे प्रोजेक्ट पूरे किए जाएंगे। मंत्रिमंडल की बैठक में तय किया गया कि छत्रपति संभाजी नगर मनपा के जलापूर्ति प्रोजेक्ट के लिए ८२२.२२ करोड़ रुपए, नागपुर महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के चार मलनिस्सारण प्रोजेक्ट के लिए २६८.८४ करोड़ रुपए और मीरा-भायंदर मनपा के जल परियोजना के लिए ११६.२८ करोड़ रुपए का कर्ज उठाया जाएगा। महायुति सरकार का तर्क है कि अमृत २.०, स्वच्छ भारत मिशन २.० और सुवर्ण जयंती नगरोत्थान महाअभियान जैसे प्रोजेक्ट समय पर पूरे हों, इसके लिए यह कदम उठाना जरूरी है, लेकिन सच्चाई यह है कि महाराष्ट्र पहले से ही भारी कर्ज तले दबा हुआ है और अब आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना होगा।
जनता को गुमराह करने का खेल है जारी
सरकार की ओर से भले ही तमाम तरह के दावे किए जा रहे हों, लेकिन सच्चाई यह है कि इन योजनाओं के नाम पर पिछले चार सालों से अरबों रुपए बहाए जा रहे हैं। इसके बावजूद शहरों की हालत जस की तस है। सड़कों पर गड्ढे बने हैं। गटर जाम रहते हैं। मुंबई समेत राज्य के तामम शहरों में मटमैली जलापूर्ति होती है। कई शहरों में पानी सप्लाई तक अधूरी रहती है। ऐसे में अब नया कर्ज लेकर विकास का सपना दिखाना जनता को गुमराह करने का खेल है।
