सामना संवाददाता / मुंबई
बेकाबू बस ने चार लोगों को रौंदा
एक व्यक्ति की मौत, तीन आईसीयू में भर्ती
ड्राइवरों की अधूरी ट्रेनिंग और लापरवाही बनी आफत
कुर्ला से दादर तक मौत का पहिया
कुर्ला में ७ और भांडुप में ४ लोगों की जान लेने वाले हादसों के बाद भी सबक नहीं लिया गया। अब दादर में एक और जान चली गई। सवाल उठ रहा है कि आखिर ड्राइवरों की ट्रेनिंग, निगरानी और जवाबदेही को लेकर ठोस कदम कब उठाए जाएंगे?
बेस्ट बसों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। नाम ‘बेस्ट’ है, लेकिन काम ‘बदतर’ से भी बदतर साबित हो रहा है। सोमवार सुबह दादर पश्चिम में एक और बेकाबू बस ने लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर दिया। जब तक वेट-लीज व्यवस्था और आधी अधूरी ट्रेनिंग का खेल बंद नहीं होगा, तब तक हर जंक्शन, हर गार्डन और हर स्टेशन पर ऐसे हादसे होते रहेंगे।
सोमवार सुबह दादर (पश्चिम) में प्लाजा सिनेमा के पास वीर कोतवाल गार्डन के निकट एक बेस्ट बस अचानक बेकाबू हो गई और चार वाहनों को टक्कर मार दी। इस भीषण हादसे में चार पैदल यात्री उसकी चपेट में आ गए, जिनमें एक राहगीर की मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को आईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया है।
यह हादसा सोमवार सुबह करीब १०:४५ बजे हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रूट क्रमांक ४६३/३१ पर चल रही बस ने पहले एक चारपहिया वाहन और एक दोपहिया वाहन को टक्कर मारी। इसके बाद बस ने आसपास पैदल चल रहे लोगों को भी अपनी चपेट में ले लिया।
घायलों को उपचार के लिए सायन अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। चश्मदीदों के अनुसार, बस के वाहनों से टकराने के समय जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनाई दी, जिससे इलाके में अफरातफरी मच गई।
हादसे की सूचना मिलते ही मुंबई ट्रैफिक पुलिस और नागरिक आपातकालीन सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंच गईं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। दुर्घटना के कारण वीर कोतवाल गार्डन और आसपास के क्षेत्रों में कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा तथा लंबा जाम लग गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ड्राइवरों की आधीअधूरी ट्रेनिंग और कथित लापरवाही के कारण बेस्ट बसें कब तक लोगों के लिए आफत बनकर सड़कों पर दौड़ती रहेंगी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष २०२४-२५ के दौरान बेस्ट बसों से जुड़े १०६ हादसे दर्ज किए गए हैं। इनमें से लगभग ८५ प्रतिशत हादसे वेट-लीज अनुबंध के तहत संचालित बसों से जुड़े बताए जाते हैं। यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई गंभीर हादसों में निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है। प्रमुख घटनाओं में कुर्ला में सात और भांडुप में चार लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था और चालक प्रशिक्षण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
हादसों का नहीं थम रहा सिलसिला
दादर का हादसा कोई अपवाद नहीं है। वर्ष २०२४-२५ में बेस्ट बसों से जुड़े १०६ सड़क हादसे दर्ज हो चुके हैं। इनमें अधिकांश मामलों में वेट-लीज बसों की भूमिका सामने आई है। बार-बार हो रहे हादसे यात्रियों और राहगीरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर रहे हैं।
