प्रभुनाथ शुक्ल भदोही
बरखा के मौसम आवते हमरा जइसन लाखों लोगन के नींद उड़ जाला। गर्मी अउर जाड़ा त किसी तरह कट जाला, बाकि जइसे ही बदरिया घेराए लागेला, मन में एगो डर समा जाला, हे भगवान! एह साल छत कहां-कहां से टपकी?
हमरा घर के छत एतना पुरनका बा कि पानी से जादे त ऊ याद लीक करे लागेला। हर बरिस हम सीमेंट, तारकोल, पन्नी, बाल्टी, तसला सब लगा देतानी, बाकिर लीक ह कि मानेला ना। छत के हालत देख के लागत बा कि ऊ खुदे मानसून विभाग से समझौता कइले बिया।
अब लीक के बीमारी खाली घर-घर तक सीमित ना रहल। ई त पूरा देश में महामारी बन गइल बा। कहीं नलवा लीक करत बा, कहीं पाइप। कहीं सरकारी गोपनीयता लीक होत बा त कहीं अफसरन के फाइल। अब त हाल ई बा कि आदमी से जादे जानकारी मोबाइल लीक कर देत बा। सबसे बड़का आफत त पेपर लीक बन गइल बा। बेचारा लइका रात-रात भर पढ़ाई करे, आंख लाल कर ले, चाय पी-पी के जिनिगी खतम कर ले, अउर परीक्षा के पहिले ही पेपर बाजार में घूमे लागे। अब विद्यार्थी परीक्षा कम दे रहल बा, लीक के इंतजार जादे कर रहल बा। आज हालत ई बा कि अटक से कटक अउर कश्मीर से कन्याकुमारी तक लीकवा के जलवा बा। कहीं भर्ती परीक्षा लीक, कहीं इंटरव्यू लीक, कहीं वीडियो लीक, त कहीं नेता जी के बयान लीक। कुछ लोग त एही लीक में आपन राजनीतिक नाव खेवे में लागल बा।
पहिले घोटाला लीक होला त देश दहल जाला। अब त रोज नया-नया लीक आवेला, लोग चाय पीते-पीते देखेला अउर आगे बढ़ जाला। डिजिटल जमाना आ गइल बा। अब छत से कम, मोबाइल से जादे लीक हो रहल बा। पहिले गोपनीय फाइल अलमारी से निकलत रहे, अब व्हॉट्सऐप यूनिवर्सिटी से सीधा वायरल हो जाला। वैसे देखा जाए त वायरल लीक के आधुनिक अवतार ह। पहिले बात धीरे-धीरे बाहर निकलत रहे, अब पांच मिनट में पूरा दुनिया जान जातिया। आदमी खांसे त वीडियो वायरल, नेता फिसले त वायरल, अफसर सो जाए त वायरल, अउर पेपर लीक हो जाए त पूरा सिस्टम वायरल! अब समझ में ना आवत बा कि देश में विकास तेज बा कि लीक। हर विभाग में कहीं ना कहीं से टपकाव जारी बा। छत टपके त बाल्टी रख दीहल जाला, बाकिर सिस्टम टपके त का रखल जाव?
लगता त ई बा कि आने वाला समय में सरकार के नया विभाग खोले के पड़ी, राष्ट्रीय लीक नियंत्रण मंत्रालय। उहां मंत्री जी रोज प्रेस कांप्रâेंस करके कहिहें, लीक पर पूरी तरह नियंत्रण बा, अउर ओही समय पीछे से एगो नया लीक बाहर आ जाई। आखिर में बस एतने कहब, हमरा देश में अब आदमी कम, लीक जादे बह रहल बा। कहीं पानी टपकत बा, कहीं गोपनीयता, अउर कहीं मेहनत के सपना। !!समाप्त!!
