प्रभुनाथ शुक्ल भदोही
मानसून के शुरुवात हो गईल बा। जेकरा वजह से पेड़ लगावई अभियान भी शुरू हो गईल बा। सरकार के कहनाम बा कि हरियाली ना बची त जान ना बची। पेड़ मर जाई त जिनिगी मर जाई। जवना के चलते सरकारी अवुरी गैर सरकारी स्तर प हरियाली के बचावे के प्रयास कईल जात बा। मानसून के मौसम में पेड़ रोपनी के उत्सव शुरू हो गईल बा। पर्यावरण संरक्षण खातिर नारा गढ़ल जा रहल बा। धरती के हरियर बनावे के अभियान जुबान अउरी कागज पर तेज हो गईल बा। पर्यावरण आ पेड़न के चिंता बरसात के मौसम में ही होला, बाकि सड़क अउर पैâक्ट्री लगावई बदे पूरा जंगल साफ कई दिहल जाला, ओकरा के कवनु चिंता नइखे। कबो सड़क बनावे खातिर पेड़ के बलि दिहल जाला त कबो अस्पताल, कबो पुल त कबो कालोनी स्थापित करे खातिर। बरसात के मौसम में जवन पेड़ लगावल जाला उहो देखभाल के कमी के चलते आपन जान गंवा देवेला।
हमनी के देश में जमीन पर काम कम, जबकि कागज पर अधिक होला। हमरे नेताजी सारा पेड़ अउर पर्यावरण संरक्षण सिर्फ जुबान अउरी फोटोबाजी में दिखल जाला। ऊ जमीनी काम पर नइखे भरोसा करले। पूरा सरकार अवुरी अधिकारी यह मिशन के सफल बनावे में व्यस्त बाड़े। एक दिन में ग्लोबल ग्रीन रिकार्ड भी बनावल जा रहल बा। गिनीज बुक में रिकार्ड बनावल जा रहल बा। करोड़ों पेड़ सरकारी रिकार्ड में लगावल जाला, जबकि जमीन प अयीसन कुछूओ नईखे देखात। इ सब कागज प होखेला। जमीन से कम पेड़ उखाड़ल जाला, लेकिन कागज प उ पूरा देखाई दिहल जाला।
नेता, अफसर, गार्ड, मंत्री, सब पेड़ लगावे खातिर बेचैन बाड़े। वन विभाग के फाइल में करोड़ों पेड़ लगावल गइल बा, बाकि जमीन पर एको पेड़ नइखे लउकल। हर साल लोगवा ग्लोबल वार्मिंग से परेशान होखे। अउरी धरती के तापमान बिना जूती के दऊड रहल बा। पार्टी के छोट-मोट नेता से लेके समूचा सरकार तक हरियाली उत्सव में आपन योगदान दे रहल बा। गाछ रोपला के बाद रोज हजारों सेल्फी सोशल मीडिया प अपलोड हो रहल बा। मुख्यमंत्री, अधिकारी, गार्ड, नेता, व्यापारी, बुद्धिजीवी, वैज्ञानिक, पर्यावरणविद सब पेड़ लगावत बा। करोड़ों के बजट हरियाली उत्सव में खर्च हो रहल बा। मुना धरती पर हरियाली दिखई के बजाय साहब के जेब पर दिखत बा। मानसून के मौसम में साहब क मुरझाइल चेहरा हरियर हो जाला। पुरान पेड़ केतना जियत बाडे ई केऊ पूछई वाला नइखे। बस एक पेड़ लगार्इं अउरी हजार फोटो-सेल्फी पोस्ट करि। बस, यहीं हौ पर्यावरण के असली प्रेम।
